# आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 जुलाई की तिथियाँ, कैलेंडर और अन्य जानकारी
Published: 2026-06-25
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Meta Title: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 जुलाई की तिथियाँ, कैलेंडर और अन्य जानकारी
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### इस लेख में आप पढ़ेंगे :

- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 जुलाई की तिथियाँ, समय और कैलेंडर

- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अर्थ एवं आध्यात्मिक महत्त्व

- गुप्त नवरात्रि में दशमहाविद्या पूजा के लाभ

- आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का इतिहास, कथा, व्रत कथाएँ, और क्यों इसे वाराही गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है

- गुप्त नवरात्रि के नियम एवं 'तंत्र साधना' ऐप पर विशेष उपासना


वर्ष की ४ प्रमुख नवरात्रियों में से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि वह है जो हिन्दू मास आषाढ़ में आती है।

तांत्रिक शक्ति उपासना हेतु यह अत्यन्त प्रभावशाली होने के कारण **‘तंत्र साधना’ ऐप** **में गुप्त शक्तिपीठ** इस सम्पूर्ण शुभ कालावधि में सभी उपयोगकर्ताओं के लिए खुला रहेगा।

## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि २०२६ की तिथियाँ एवं समय

**आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 : १५ जुलाई (बुधवार) से २३ जुलाई (गुरुवार) तक**

**घटस्थापन मुहूर्त — १५ जुलाई को प्रातः ५:३३ से १०:०९ तक**

घटस्थापन मुहूर्त प्रतिपदा तिथि में है।

**प्रतिपदा तिथि — १४ जुलाई को अपराह्ण ३:१२ से १५ जुलाई को पूर्वाह्ण ११:५० तक**

**नवमी तिथि — २२ जुलाई को प्रातः ५:१६ से २३ जुलाई को प्रातः ७:०३ तक**

## **आषाढ़ गुप्त नवरात्रि जुलाई 2026 कैलेंडर**

दिन

तिथि

नवदुर्गा

दशमहाविद्या

० (अमावस्या)

१४ जुलाई (मंगल)

(लागू नहीं)

माँ काली

१ (प्रतिपदा)

१५ जुलाई (बुध)

माँ शैलपुत्री

माँ तारा

२ (द्वितीया)

१६ जुलाई (गुरु)

माँ ब्रह्मचारिणी

माँ त्रिपुर सुंदरी

३ (तृतीया)

१७ जुलाई (शुक्र)

माँ चंद्रघंटा

माँ भुवनेश्वरी

४ (चतुर्थी)

१८ जुलाई (शनि)

माँ कूष्माण्डा

माँ भैरवी

५ (पंचमी)

१९ जुलाई (रवि)

माँ स्कंदमाता

माँ छिन्नमस्ता

६ (षष्ठी)

२० जुलाई (सोम)

माँ कात्यायनी

माँ धूमावती

७ (सप्तमी)

२१ जुलाई (मंगल)

माँ कालरात्रि

माँ बगलामुखी

८ (अष्टमी)

२२ जुलाई (बुध)

माँ महागौरी

माँ मातंगी

९ (नवमी)

२३ जुलाई (गुरु)

माँ सिद्धिदात्री

माँ कमलात्मिका

## आषाढ़ नवरात्रि क्या है?

संस्कृत शब्द ‘नवरात्रि’ निर्मित है—‘नव’, जिसका अर्थ ९ है, तथा ‘रात्रि’, जिसका अर्थ रात्रि है—इन शब्दों से।

नवरात्रि सनातन धर्म का एक उत्सव है, जो **९ रात्रियों** तक चलता है। इस अवधि में आदिशक्ति जगन्माता की उपासना और आराधना की जाती है।

शुक्ल प्रतिपदा से शुक्ल नवमी तक प्रतिमास आने वाली मासिक नवरात्रि के अतिरिक्त, हिन्दू पंचांग में चन्द्रमा तथा ऋतु परिवर्तन के अनुरूप वर्ष में **४ प्रमुख नवरात्रियाँ** होती हैं :

- माघ मास (जनवरी/फ़रवरी) में माघ नवरात्रि

- चैत्र मास (मार्च/अप्रैल) में चैत्र नवरात्रि

- **आषाढ़** मास **(जून/जुलाई)** में **आषाढ़ नवरात्रि**

- आश्विन मास (सितम्बर/अक्टूबर) में [शारदीय नवरात्रि](https://tantrasadhana.app/blog/sharad-navratri-dates-significance-rituals-hindi)


![नवरात्रि की घटस्थापना का एक छायाचित्र।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-cp-1782372726989-compressed.png)स्रोत : mydivinesutra.com

## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि क्या है?

माघ नवरात्रि की भाँति, आषाढ़ नवरात्रि भी एक गुप्त नवरात्रि है, इसलिए इसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि चैत्र और शारद नवरात्रियों के समान सामाजिक समागमों, संगीत तथा नृत्य के साथ मनाया जाने वाला भव्य उत्सव नहीं है।

इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह केवल परिवर्तनकारी आध्यात्मिक साधनाओं, विशेषतः तांत्रिक अथवा गूढ़ साधनाओं, के लिए समर्पित है।

इस काल में देवी के तांत्रिक तथा अल्पप्रसिद्ध स्वरूपों, जैसे **दशमहाविद्याएँ, माँ प्रत्यंगिरा तथा माँ वाराही,** की उपासना गुप्त तांत्रिक ग्रन्थों एवं परम्पराओं में वर्णित विस्तृत अनुष्ठानों द्वारा की जाती है।

इन अनुष्ठानों के लिए सामान्यतः किसी प्रतिष्ठित परम्परा के अनुभवी तथा योग्य गुरु से दीक्षा आवश्यक होती है।

### गुप्त नवरात्रि का गूढ़ अर्थ

लोकप्रसिद्ध नवरात्रियाँ देवी के बाह्य असुरों पर विजय का उत्सव हैं।

गुप्त नवरात्रियाँ **अन्तःस्थित गुप्त असुरों**, जैसे भय, आसक्ति, अज्ञान, अहंकार, कामना, क्रोध तथा पृथकत्व के भ्रम, पर विजय प्राप्त करने की साधना हैं।

गुप्त नवरात्रियों का ‘गुप्त’ केवल गुप्त अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, अपितु साधक की अपनी चेतना के उन **गुप्त आयामों** का भी संकेत है, जिन्हें जगन्माता क्रमशः प्रत्यक्ष करती हैं।

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## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्त्व : क्यों इसका पालन किया जाता है

### ज्योतिषीय महत्त्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हिन्दू मास आषाढ़ में **वर्षा ऋतु** के आरम्भ में आती है, जो स्वाभाविक रूप से **नवजीवन, शुद्धीकरण एवं नवारम्भों** का प्रतीक है।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह काल ३ अत्यन्त पूजनीय नक्षत्रों के सामर्थ्यशाली संयोग से प्रभावित होता है : **पुनर्वसु**(पुनर्जन्म तथा रूपान्तरण का प्रतीक), **पुष्य**(संरक्षण तथा आध्यात्मिक पोषण का सूचक), तथा **आश्लेषा**(ब्रह्माण्डीय शक्ति एवं विपत्तियों पर विजय से सम्बद्ध)।

ये तीनों मिलकर एक अद्वितीय ब्रह्माण्डीय संयोग का निर्माण करते हैं, जो आध्यात्मिक उन्नति, आरोग्य तथा आत्मसाक्षात्कार के लिए अत्यन्त उपयुक्त वातावरण निर्मित करता है।

### तांत्रिक महत्त्व

तांत्रिक दृष्टि से **आषाढ़** वार्षिक आध्यात्मिक चक्र में एक संक्रमण काल का द्योतक है। जैसे ही वर्षा ऋतु के मेघ एकत्रित होते हैं और प्रकृति अन्तर्मुखी होती है, साधकों को बाह्य विकर्षणों से निवृत्त होकर गहन चिन्तन की अवस्थाओं में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

गूढ़ दृष्टि से ये ९ रात्रियाँ **स्थूल, सूक्ष्म तथा कारण शरीरों** के क्रमिक शुद्धीकरण का प्रतीक हैं।

इन ९ रात्रियों को उन ९ अवस्थाओं के रूप में भी देखा जा सकता है, जिनसे होकर जीवचेतना बन्धन से आदिशक्ति के साथ एकत्व की यात्रा करती है।

जहाँ प्रकट नवरात्रियों का केन्द्रबिन्दु दैवी शक्ति का आवाहन है, वहीं गुप्त नवरात्रियों का केन्द्रबिन्दु **दैवी प्रज्ञा के प्रति ग्रहणशील बनना** है। इसलिए आषाढ़ गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से निम्नलिखित के लिए अत्यन्त अनुकूल मानी जाती है :

- जप अनुष्ठान तथा मंत्र सिद्धि

- कुण्डलिनी साधनाएँ

- गुरु उपासना

- ध्यान

- महाविद्या उपासना


## गुप्त नवरात्रि में दशमहाविद्या पूजा के लाभ

४ प्रमुख नवरात्रियों के विपरीत, जिनमें माँ दुर्गा के ९ स्वरूपों (नवदुर्गाओं) की उपासना की जाती है, गुप्त नवरात्रि में **दशमहाविद्याओं**(तंत्र की १० ज्ञानस्वरूपा देवियों) की उपासना की जाती है, जो सामूहिक रूप से दैवी चेतना के सम्पूर्ण विस्तार का प्रतिनिधित्व करती हैं।

![दशमहाविद्याओं के मूर्तिशास्त्रीय चित्रणों का एक कोलाज।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-cp-1782372729857-compressed.jpeg)स्रोत : en.wikipedia.org

प्रत्येक महाविद्या एक विशिष्ट आध्यात्मिक रूपान्तरण का कारण बनती हैं :

- **माँ काली :** काल तथा भय का अतिक्रमण

- **माँ तारा :** दिव्य ज्ञान तथा संरक्षण

- **माँ त्रिपुर सुंदरी :** सामंजस्य तथा आध्यात्मिक परिपूर्णता

- **माँ भुवनेश्वरी :** चेतना का विस्तार

- **माँ भैरवी :** तप तथा आन्तरिक शक्ति

- **माँ छिन्नमस्ता :** अहंकार का अतिक्रमण

- **माँ धूमावती :** वैराग्य के माध्यम से प्रज्ञा

- **माँ बगलामुखी :** हानिकारक प्रभावों पर नियन्त्रण

- **माँ मातंगी :** वाणी तथा ज्ञान पर प्रभुत्व

- **माँ कमलात्मिका :** समृद्धि तथा आध्यात्मिक सम्पन्नता


ऐसा माना जाता है कि **आषाढ़ गुप्त नवरात्रि** महाविद्या उपासना के फलों को और अधिक वर्धित करती है, क्योंकि इसकी सूक्ष्म शक्तियाँ स्वाभाविक रूप से ऐसे आन्तरिक रूपान्तरण का समर्थन करती हैं।

## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का इतिहास और कथा

पवित्र ग्रन्थों के अनुसार, इस साधना काल की उत्पत्ति **महर्षि विश्वामित्र तथा महर्षि वशिष्ठ** से सम्बद्ध मानी जाती है।

जब उनके प्रारम्भिक आध्यात्मिक प्रयास अपेक्षित दिव्य सिद्धियों की प्राप्ति कराने में सफल नहीं हुए, तब उन्होंने कालचक्र में गुप्त नवरात्रि के इस छिपे हुए अवसर का अन्वेषण किया।

**इन ९ दिनों के समय गुप्त रूप से शक्ति साधना करके उन्होंने अपने आध्यात्मिक उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया।**

तभी से यह काल सामुदायिक उत्सवों से दूर, एकान्त एवं शांत उपासना के लिए सुरक्षित माना गया है।

यह माना जाता है कि इस समय दैवी चेतना अपने चरम पर होती है, इसलिए **कामाख्या, बंगाल, ओडिशा, नेपाल तथा कश्मीर** जैसे क्षेत्रों की तांत्रिक परम्पराओं में इसका ऐतिहासिक रूप से अत्यन्त महत्त्व रहा है।

बाह्य अनुष्ठानों का सम्पादन करने के स्थान पर साधक **मानसिक साधना** करते हैं।

इन ९ दिनों के समय पूर्ण गोपनीयता में तपश्चर्या, पुरश्चरण तथा मंत्र दीक्षा ग्रहण करना आध्यात्मिक फलों को अनेक गुना बढ़ाने वाला माना जाता है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

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## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की व्रत कथाएँ

### ऋषि शृंगी

**पौराणिक ग्रन्थों** के अनुसार, गुप्त नवरात्रि की कथा का घनिष्ठ सम्बन्ध **ऋषि शृंगी** से माना जाता है।

एक बार जब ऋषि शृंगी अपने शिष्यों और भक्तों की सभा को सम्बोधित कर रहे थे, तब एक **व्यथित स्त्री** भीड़ से निकलकर उनके चरणों में गिर पड़ी। उसने गहन शोक के साथ निवेदन किया कि उसका पति कुसंगति में पड़ गया है और पापपूर्ण आचरणों में लिप्त है।

इसके कारण उसका परिवार विनष्ट हो गया था, और वह दैवी सहायता प्राप्त करने के लिए किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा अथवा व्रत का पालन करने में असमर्थ थी।

ऋषि शृंगी ने उसे सान्त्वना दी और गुप्त नवरात्रि के विषय में बताया। उन्होंने समझाया कि जहाँ प्रकट नवरात्रियाँ (चैत्र और शारद) सामान्य देवी उपासना के लिए हैं, वहीं गुप्त नवरात्रियाँ **गोपनीय एवं तीव्र अनुष्ठानों** हेतु अत्यन्त सामर्थ्यशाली मानी जाती हैं।

उन्होंने उसे परामर्श दिया कि आगामी **आषाढ़ गुप्त नवरात्रि** में वह गोपनीय रूप से देवी का व्रत और उपासना करे। ऋषि के निर्देशानुसार उस स्त्री ने पूर्ण अनुशासन और अखण्ड भक्ति के साथ व्रत का पालन किया तथा अपने अनुष्ठानों को गोपनीय रखा।

इसके परिणामस्वरूप उसके गृह की समस्त नकारात्मकता समाप्त हो गई, उसके पति की बुद्धि परिष्कृत हो गई, और उसका जीवन उत्तम दिशा में परिवर्तित हो गया। तभी से इस व्रत का पालन **गहन व्यक्तिगत संकटों** पर विजय प्राप्त करने के लिए अत्यन्त फलदायक माना जाता है।

### राजकुमार सुदर्शन

एक अन्य वर्णन **देवी भागवत पुराण** के तृतीय स्कन्ध में वर्णित **राजकुमार सुदर्शन** की कथा से प्राप्त होता है। सुदर्शन कोसल के राजा ध्रुवसन्धि का कुमार पुत्र था।

राजा के निधन के पश्चात् उत्तराधिकार को लेकर प्रतिद्वन्द्वी रानियों तथा राजकीय पक्षों के मध्य संघर्ष उत्पन्न हो गया। युवा राजकुमार की माता मनोरमा उसे लेकर वन में चली गईं और **महर्षि भरद्वाज के आश्रम** में शरण ली।

वहाँ उस बालक ने बारम्बार **‘क्लीं’** बीजाक्षर सुना। यह विख्यात कामबीज है, जो माँ दुर्गा, माँ त्रिपुर सुंदरी तथा शाक्त तंत्र में प्रकटन की शक्ति का प्रतीक है।

यद्यपि उसने बिना औपचारिक दीक्षा के निष्कपट भाव से उसका उच्चारण किया, तथापि वह मंत्र **अज्ञात जप** के माध्यम से कार्य करने लगा।

सुदर्शन का यह सहज जप देवी की कृपा से सिद्धि में परिणत हो गया। बाद में देवी ने बहुभुजा, विविध आयुध धारण किए हुए तथा दिव्य तेज से दीप्त एक स्वरूप में सुदर्शन को दर्शन दिए।

गुप्त नवरात्रि का काल होने के कारण देवी ने उसे शत्रुतापूर्ण शक्तियों से संरक्षण प्रदान किया तथा अपने दिवंगत पिता का सिंहासन प्राप्त करके राज्य करने हेतु आशीर्वाद दिया।

कालान्तर में सुदर्शन का विवाह **राजकुमारी शशिकला** के साथ सम्पन्न हुआ—सब देवी के संरक्षण में।

## क्यों आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को वाराही गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है

श्रीविद्या तथा तांत्रिक परम्पराओं में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का घनिष्ठ सम्बन्ध वाराही देवी से माना जाता है। वे माँ त्रिपुर सुंदरी की दिव्य सेनाओं की **वराहमुखी सेनापति** तथा भगवान विष्णु के १० प्रमुख अवतारों में से एक भगवान वराह की **शक्ति** हैं।

जिस प्रकार भगवान वराह ने पृथ्वी का ब्रह्माण्डीय सागर से उद्धार किया था, उसी प्रकार माँ वाराही जीवात्मा का अज्ञान, भय तथा कर्मबन्धन से उद्धार करती हैं।

उनकी **दंष्ट्राएँ गहन स्तरों तक खनन करके** छिपी हुई समस्याओं तथा गहराई से जड़ जमाई हुई कर्मजन्य प्रवृत्तियों को **उन्मूलित** करने की शक्ति के प्रतीक हैं, जिन्हें सामान्य प्रयास दूर नहीं कर सकते।

![वाराही देवी के मूर्तिशास्त्रीय स्वरूप का एक चित्रण।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-cp-1782372728995-compressed.png)स्रोत : vgocart.com

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को प्रायः **वाराही नवरात्रि अथवा वाराही गुप्त नवरात्रि** भी कहा जाता है, क्योंकि माँ वाराही निम्नलिखित की अधिष्ठात्री हैं :

• सूक्ष्म लोकों में गुप्त प्रक्रियाएँ तथा कार्य

• आन्तरिक रूपान्तरण

• साधकों तथा साधना का संरक्षण

• अदृश्य विघ्नों का निवारण

• नकारात्मक तांत्रिक प्रभावों का विनाश

• विजय का प्रदान

अतः इस कालखंड की सूक्ष्म शक्तियाँ उनकी कृपा को विशेष रूप से सुलभ बनाती हैं।

चूँकि गुप्त नवरात्रि का सम्बन्ध स्वयं गुप्त आध्यात्मिक साधना से है, इसलिए अनेक परम्पराओं में इन ९ रात्रियों के दौरान **माँ वाराही की विशेष उपासना** की जाती है।

## आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में पालन किए जाने वाले नियम, अनुष्ठान तथा अनुमत आहार

यद्यपि परम्पराओं के अनुसार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में पालन किए जाने वाले नियम, अनुष्ठान तथा अनुमत आहार भिन्न हो सकते हैं, तथापि निम्नलिखित आध्यात्मिक अनुशासन सामान्यतः पालन किए जाते हैं:

- जगन्माता की दैनिक उपासना

- दुर्गा सप्तशती, ललिता सहस्रनाम तथा ललिता त्रिशती का पाठ

- महाविद्या मंत्र जप

- श्रीविद्या मूल मंत्र जप

- श्री यंत्र की नवावरण पूजा

- ब्रह्मचर्य का पालन

- सत्यपालन तथा आत्मसंयम

- क्रोध तथा परनिन्दा का संयम


### मुख्य अनुष्ठान एवं नियम

- **गोपनीयता :** यह सबसे महत्त्वपूर्ण नियम है। प्रार्थनाओं, मंत्रों तथा व्रत का प्रदर्शन अथवा अन्य लोगों के साथ उनका खुला उल्लेख नहीं करना चाहिए, जिससे उनकी आध्यात्मिक शक्ति अक्षुण्ण बनी रहे।

- **घटस्थापन (कलश स्थापना) :** प्रथम दिवस पवित्र कलश की स्थापना की जाती है। भक्त ताम्र, पीतल अथवा मृत्तिका के कलश का प्रयोग करते हैं—लौह अथवा इस्पात के कलश का प्रयोग नहीं करते।

- **मंत्र जप :** भक्त रुद्राक्ष अथवा रक्तचन्दन की जपमाला से विशिष्ट महाविद्या मंत्रों का जप करते हैं।

- **आहार सम्बन्धी नियम :** सात्त्विक आहार (प्याज तथा लहसुन रहित) का पालन किया जाता है।


## 'तंत्र साधना' ऐप पर उपासना का विशेष अवसर

### 'तंत्र साधना' ऐप

**निःशुल्क तथा विज्ञापन-रहित** ‘तंत्र साधना’ ऐप का निर्माण हिमालयी संन्यासी **ओम स्वामी** द्वारा केवल इस उद्देश्य से किया गया है कि **दशमहाविद्याओं** की तांत्रिक उपासना सभी के लिए सुलभ हो सके।

जिन्हें जगन्माता अथवा तंत्र की ओर आह्वान का अनुभव होता है, उनके लिए ‘तंत्र साधना’ ऐप एक मार्गदर्शित एवं जागृत साधना पथ प्रदान करती है, चाहे उन्हें दीक्षा प्राप्त न हुई हो अथवा उनका कोई व्यक्तिगत गुरु न हो।

यह **दिव्याचार** के पवित्र मार्ग का अनुसरण करती है, इसलिए किसी भी अनुष्ठान में किसी भौतिक अर्पण की आवश्यकता नहीं होती।

सभी अनुष्ठानों को ओम स्वामी द्वारा जागृत करके ऐप में इस प्रकार कोड किया गया है कि वे त्रुटिरहित रहें। इसके अतिरिक्त, सभी जागृत मंत्र उनके रिकॉर्ड किए गए स्वर में श्रवण किए जाते हैं।

उपयोगकर्ता अपनी यात्रा का आरम्भ माँ काली के चित्ताकर्षक लोक का उद्घाटन करके तथा ३३ दिनों तक **तांत्रिक मंत्र जप, यज्ञ** और तल्लीनकारी **शव साधना** के माध्यम से उनकी जागृति करके करते हैं।

इसके पश्चात् वे दूसरी महाविद्या माँ तारा के लोक का उद्घाटन करते हुए आगे बढ़ते हैं।

यह यात्रा अन्ततः माँ कमलात्मिका—जो देवी लक्ष्मी का तांत्रिक स्वरूप तथा दशम महाविद्या हैं—तक पहुँचकर पूर्ण होती है।

### आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 हेतु गुप्त शक्तिपीठ

गुप्त शक्तिपीठ १० महाविद्या लोकों से पृथक एक लघु, विशेष लोक है। यह केवल उन दिनों में प्रकट होता है जो महाविद्या उपासना के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली तथा फलदायक माने जाते हैं।

१० महाविद्या लोकों के विपरीत, यह ऐप की मुख्य यात्रा में उपयोगकर्ताओं की प्रगति से निरपेक्ष होकर सभी के लिए सुलभ रहता है।

यह शक्तिपीठ आगामी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की सम्पूर्ण ९ रात्रियों के दौरान प्रकट होकर खुला रहेगा, जिससे सभी उपयोगकर्ता १० दिनों में दशमहाविद्याओं की उपासना कर सकेंगे। इसका आरम्भ १४ जुलाई की अमावस्या को माँ काली से होगा तथा समापन २४ जुलाई को माँ कमलात्मिका के साथ होगा।

प्रत्येक महाविद्या की उपासना उनके **ध्यान श्लोक तथा बीजाक्षरों-सहित मूल मंत्र** के जप द्वारा होगी, जिसकी संख्या का निर्धारण उपयोगकर्ता स्वयं करेंगे।

**गुप्त शक्तिपीठ के खुले रहने की अवधि :**

**१४ जुलाई (मंगलवार) मध्यरात्रि १२:०० से २४ जुलाई (शुक्रवार) मध्यरात्रि १२:०० तक**

यदि आप दीर्घकाल से तंत्र संबंधी प्रचुर कंटेंट ग्रहण करते आ रहे हैं और यह विचार कर रहे हैं कि अपनी साधना का आरम्भ कैसे, कब और कहाँ से करें, तो यह आपकी खोज का समापन तथा आपके जीवन के एक नवीन अध्याय का आरम्भ है।

माँ की कृपा को जागृत करें। परमात्मा के प्रेम में निमग्न हो जाएँ।

माँ केवल उन्हीं को बुलाती हैं जो उनकी उपासना के लिए तैयार होते हैं। यदि आप यहाँ हैं, तो आप तैयार हैं। दशमहाविद्याओं को जागृत करें। और भक्ति में आरोह करें।

[माँ की कृपा को जागृत करें](https://tantra-sadhana-app.onelink.me/jgcg/24u3wjsu)
## FAQs
Q: गुप्त नवरात्रि कितने दिनों तक होती है?
A: <p>नवदुर्गा उपासक गुप्त नवरात्रि ९ दिनों तक मनाते हैं—प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक। तांत्रिक दशमहाविद्या उपासक एक दिन पहले, अमावस्या से माँ काली की पूजा के साथ इसका आरम्भ करते हैं।<br></p>

Q: २०२६ में दूसरी गुप्त नवरात्रि कब है?
A: <p>​२०२६ की दूसरी गुप्त नवरात्रि १५ जुलाई से २३ जुलाई तक है। यह आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होकर नवमी तिथि तक मनाई जाती है।<br></p>

Q: २ गुप्त नवरात्रियाँ कब आती है?
A: <p>वर्ष में&nbsp;२ नवरात्रियाँ आती है—पहली माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में।<br>वर्ष २०२६ में पहली गुप्त नवरात्रि १९ जनवरी से २७ जनवरी तक तथा दूसरी गुप्त नवरात्रि १५ जुलाई से २३ जुलाई तक है।<br></p>




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