तंत्र पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तकें — शास्त्रीय एवं आधुनिक, उद्धरणों सहित

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इस लेख में आप पढ़ेंगे :

  • तंत्र पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में से ९ पुस्तकें

  • ‘तंत्र साधना’ ऐप के साथ शास्त्रीय ज्ञान को व्यवहार में उतारें

भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परम्परा में तंत्र एक रूपान्तरणकारी तथा समन्वयात्मक मार्ग के रूप में प्रतिष्ठित है, जो भक्ति, दर्शन, बाह्य अनुष्ठानों तथा आन्तरिक शक्ति-साधना का समन्वय करता है।

आधुनिक साहित्य में प्रायः तंत्र को या तो रहस्यवाद अथवा भोग-विलास के रूप में विकृत करके प्रस्तुत किया जाता है, जबकि उसका वास्तविक मार्ग अनुशासन, पवित्रता तथा आत्मजागरण का है।

तंत्र पर आधारित निम्नलिखित आध्यात्मिक पुस्तकें साधकों को प्राचीन ज्ञान, व्यावहारिक साधना-पद्धतियों तथा अंतिम मोक्ष के लक्ष्य पर आधारित मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

१. रुद्रयामल तंत्र

शैव-शाक्त परम्पराओं के सर्वाधिक आधारभूत शास्त्रों में से एक,रुद्रयामल तंत्र रुद्र (शिव) और देवी (पार्वती) के संवाद के माध्यम से तंत्र के विविध मूल सिद्धान्तों तथा उनके अनुप्रयोगों का गहन विवेचन प्रस्तुत करता है।

पेड़ के नीचे भगवान शिव और देवी पार्वती के मध्य संवाद का एक चित्रण।
स्रोत : ramcharitmanas.info

अनूदित उद्धरण :

“शक्ति ही कुण्डलिनी देवी हैं, जो जगन्माता का यथार्थ स्वरूप हैं। शक्ति का प्राण समस्त ब्रह्माण्ड में नक्षत्रों, तारकागणों तथा तिथियों सहित व्याप्त है। उनके द्वारा निर्दिष्ट विधि के अनुसार साधना करने से एक मास में खेचरावस्था, दो मास में वज्रदेह आदि की प्राप्ति होती है। अन्ततः प्राणवायुओं के ज्ञान द्वारा साधक परमशिव के साथ एकरूप हो जाता है।”

इस प्रकार, यह योग के कुछ मूलभूत सिद्धान्तों पर प्रकाश डालता है—शक्ति (गतिशील ऊर्जा) और शिव (परम चैतन्य) का ऐक्य।

२. विज्ञान भैरव तंत्र

विज्ञान भैरव तंत्र में ध्यान की ११२ प्रभावशाली विधियों का वर्णन है, जो श्वास, ध्वनि तथा स्पर्श जैसी अनुभूतियों की शक्ति का उपयोग करके साधकों को चैतन्य की उच्चतर अवस्थाओं का अनुभव कराने में सहायक होती हैं।

अनूदित उद्धरण :

“जो यह जानता है कि पीड़ा अथवा सुख, ध्वनि अथवा निःशब्दता, रूप अथवा अरूप—समस्त अनुभूतियाँ चैतन्य में ही उदित होती हैं और उससे पृथक् नहीं हैं, ऐसा पुरुष भैरवावस्था में स्थित रहता है।”

ऐसी शिक्षाएँ चैतन्य के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए आध्यात्मिक साधकों को इन ध्यान-विधियों के अभ्यास के लिए उपयुक्त मनोभाव प्रदान करती हैं।

३. अभिनवगुप्त द्वारा रचित तंत्रालोक

अभिनवगुप्तकृत तंत्रालोक(तंत्रों का प्रकाश) त्रिक/कश्मीर शैव परम्परा में तंत्र और मंत्र पर एक महान तंत्र-मंत्र मार्गदर्शक ग्रन्थ माना जाता है। तंत्रालोक का संक्षिप्त रूप—तंत्रसार—इसके सार को समझने के लिए अत्यन्त उपयुक्त है।

अनूदित उद्धरण :

“आत्मा न तो जड़ है और न ही स्थिर; वह प्रतीत होने वाली निश्चलता में भी चैतन्य के साथ स्पन्दित होती रहती है। जैसे एक दीपशिखा स्थिर प्रतीत होते हुए भी कम्पित रहती है, उसी प्रकार चैतन्य समस्त बोध, विचार और अनुभव के रूप में स्पन्दित होता है। आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना प्रत्येक वस्तु में—यहाँ तक कि मौन में भी—उस सूक्ष्म स्पन्दन का अनुभव करना है।”

यह इस परम्परा के अद्वैत दर्शन की विशिष्टता को प्रतिपादित करता है, जिसमें आत्मा अथवा शिव को निष्क्रिय नहीं, अपितु सक्रिय चैतन्य के रूप में देखा जाता है।

४. कुलार्णव तंत्र

शास्त्रीय कौल परम्परा का एक प्रमुख ग्रन्थ, कुलार्णव तंत्र गुरु-शिष्य सम्बन्ध, साधना में पवित्रता तथा दीक्षा के महत्त्व पर विशेष बल देता है। आचार-संहिता तथा परम्परागत तंत्र साधना की पवित्रता के विषय में अपने स्पष्ट मत के कारण इसका प्रायः उल्लेख किया जाता है।

अनूदित उद्धरण :

“दीक्षा में ऐसे मंत्र प्रदान किए जाने चाहिए, जो आन्तरिक पवित्रता तथा गहन एकाग्रता की अवस्था में दिए गए हों। गुरु आत्मसाक्षात्कारी, भक्तिपरायण तथा अनुशासित होना चाहिए, और शिष्य विनम्र, ग्रहणशील तथा श्रद्धावान होना चाहिए। यथार्थ दीक्षा केवल एक अनुष्ठान नहीं है—वह जीवात्मा के अपने दिव्य उद्गम के स्मरण की जागृति है।”

इस प्रकार यह ग्रन्थ तांत्रिक ज्ञान के संप्रेषण के लिए अपेक्षित उपयुक्त परिस्थितियों का निरूपण करता है।

५. महानिर्वाण तंत्र

महानिर्वाण तंत्र अपेक्षाकृत अधिक सुगम तांत्रिक शास्त्रों में से एक है, जो देवता-उपासना तथा मोक्ष के अन्य मार्गों का निरूपण करता है—केवल संन्यासियों के लिए ही नहीं, अपितु उन गृहस्थों के लिए भी, जो सांसारिक जीवन में संलग्न रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।

अनूदित उद्धरण :

“मोक्ष केवल आत्मज्ञान से ही प्राप्त होता है, और वह ज्ञान तब उदित होता है, जब मन जगन्माता की भक्ति द्वारा शुद्ध हो जाता है। निष्कपट भाव से उनकी उपासना करें, और वे अज्ञान के आवरण को दूर करके आपके वास्तविक स्वरूप को सनातन तत्त्व के रूप में प्रत्यक्ष कर देंगी।”

इस प्रकार, यह ग्रन्थ जगन्माता आद्याशक्ति की उनके विविध स्वरूपों में उपासना को मोक्ष का एक पूर्ण मार्ग प्रतिपादित करता है।

६. त्रिपुरा रहस्य

इसमें भगवान दत्तात्रेय और उनके शिष्य परशुराम के मध्य संवाद का वर्णन है, जिसके माध्यम से देवी त्रिपुर सुंदरी की शिक्षाओं का उपदेश दिया गया है। यद्यपि इसमें अनुष्ठानों पर अपेक्षाकृत कम बल दिया गया है, तथापि त्रिपुरा रहस्य श्रीविद्या साधकों के लिए तंत्र पर उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों में से एक है।

भगवान दत्तात्रेय भगवान परशुराम को उपदेश दे रहे हैं तथा ऊपर से देवी त्रिपुर सुंदरी उन्हें निहार रही हैं — ऐसा एक चित्रण।
स्रोत : facebook.com/Thulasi.Datta

अनूदित उद्धरण :

“उन्हें त्रिपुरा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वे अस्तित्व की तीनों अवस्थाओं—जाग्रत, स्वप्न तथा सुषुप्ति—में प्रकाशित रहती हैं। वे सदैव उपस्थित रहती हैं, किन्तु दृष्टिगोचर नहीं होतीं। ऋषिगण कहते हैं, ‘जिस प्रकार एक दीपक वस्तुओं को प्रकाशित करता है, किन्तु जब उसका प्रकाश समस्त स्थान को आलोकित कर देता है, तब वह स्वयं दृष्टिगोचर नहीं होता, उसी प्रकार वे समस्त की छिपी हुई साक्षी हैं।’”

यह ग्रन्थ ललिता त्रिपुर सुंदरी को स्वयं ब्रह्म के रूप में निरूपित करता है—वह अपरिवर्तनशील चैतन्य जो सम्पूर्ण प्रकट जगत् का आधार है।

७. कुलचूडामणि तंत्र

कुलचूडामणि तंत्र चक्र-प्रणाली, कुण्डलिनी शक्ति तथा सूक्ष्म शरीर के रूपान्तरण को समझने के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसमें मंत्र-जागृति तथा ऊर्जा-मार्गों के शोधन के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो तंत्र में आवश्यक माने जाते हैं।

अनूदित उद्धरण :

“दशमहाविद्याएँ स्वयं देवी से पृथक् नहीं हैं। वे उनके भाव, उनकी शक्तियाँ तथा उनकी दिव्य इच्छा की ज्वालाएँ हैं। जब जगन्माता ने अपने अनेकों स्वरूपों को प्रकट करने की इच्छा की, तब उन्होंने उन्हीं के रूप में अभिव्यक्ति धारण की।”

यह दशमहाविद्याओं के विषय में इस ग्रन्थ द्वारा प्रदत्त प्रमुख शिक्षाओं में से एक है, पाठकों का उनकी तंत्र साधना से परिचय कराने हेतु।

८. प्रपंचसार तंत्र

जगद्गुरु आदिशंकराचार्य द्वारा रचित माना जाने वाला प्रपंचसार तंत्रवेदान्त का पूर्वपरिचय रखने वाले उन साधकों के लिए तंत्र पर एक उत्कृष्ट आध्यात्मिक पुस्तक है, जो तांत्रिक अनुष्ठानों तथा शाक्त दर्शन, दोनों का अध्ययन करना चाहते हैं।

जगद्गुरु आदि शङ्कराचार्य का एक रंगीन चित्रण।
स्रोत : srisharadapeetham.com

अनूदित उद्धरण :

“जब मंत्र श्वास के साथ संयुक्त होता है, और श्वास का संचालन सजगता के साथ किया जाता है, तब देवी साधक के शरीर में जागृत होती हैं। वे केवल मन्दिरों में ही नहीं, अपितु नाड़ियों, अग्नि तथा मन में भी जीवित और प्रत्यक्ष रूप से नृत्य करती हैं।”

ऐसे वर्णन वेदान्त और शाक्त तंत्र के पक्षों का अत्यन्त सुन्दर समन्वय प्रस्तुत करते हैं।

९. सर जॉन वुडरॉफ (आर्थर एवलॉन) की इंट्रोडक्शन टू तंत्र शास्त्र

अंग्रेज़ी भाषा के लेखकों में सर जॉन वुडरॉफ अपने गहन शास्त्रीय अध्ययन के लिए विशेष रूप से विख्यात हैं। तंत्र पर उनकी सभी पुस्तकें अवश्य पठनीय हैं। इंट्रोडक्शन टू तंत्र शास्त्र तंत्र के व्यापक तर्क, उद्देश्य तथा विश्वदृष्टि को समझने का एक सुगम प्रवेशद्वार है, और इसलिए वाचन आरम्भ करने हेतु उत्कृष्ट है।

सर जॉन वुड्रॉफ (आर्थर ऐवलॉन) का एक श्वेत-श्याम छायाचित्र।
स्रोत : upload.wikimedia.org

अनूदित उद्धरण :

“शरीर का त्याग नहीं किया जाना चाहिए, अपितु उसे दिव्य बनाया जाना चाहिए। यह जगन्माता का चलायमान मन्दिर है। इसी के माध्यम से, मंत्र, मुद्रा तथा ध्यान की सहायता से, साधक यह साक्षात्कार करता है कि मानव दिव्य है।”

यह इस तथ्य को प्रतिपादित करता है कि तंत्र संसार अथवा शरीर का परित्याग करने के स्थान पर उन्हें आत्मजागरण के पवित्र साधनों के रूप में स्वीकार करता है।

इनमें से प्रत्येक पुस्तक तंत्र के विशाल तन्तुविन्यास के एक सजीव सूत्र का प्रतिनिधित्व करती है। चाहे आप किसी तंत्र-मंत्र मार्गदर्शक ग्रन्थ की खोज में हों अथवा दर्शन पर आधारित आध्यात्मिक तंत्र-पुस्तकों की, यह सूची आपके अन्वेषण के लिए एक विश्वसनीय प्रारम्भ-बिन्दु प्रस्तुत करती है।

‘तंत्र साधना’ ऐप के साथ शास्त्रीय ज्ञान को व्यवहार में उतारें

तंत्र साधना, एक निःशुल्क तथा विज्ञापन-मुक्त ऐप, का निर्माण ओम स्वामी ने किया है—मानसिक उपासना के तांत्रिक मार्ग, दिव्याचार, के सिद्धान्तों का अनुसरण करते हुए दशमहाविद्याओं (तंत्र की १० ज्ञानस्वरूपा देवियों) की उपासना में स्वयं सिद्धि प्राप्त करने के उपरान्त।

यह आपको माँ काली से लेकर माँ कमलात्मिका तक दशमहाविद्याओं को समर्पित १० थ्री-डी लोकों की यात्रा पर ले जाता है, जहाँ आप निर्दिष्ट अवधियों में क्रमशः उनके तांत्रिक मंत्र जप, यज्ञ तथा गूढ़ साधनाओं का अनुष्ठान करके उनका आवाहन करते हैं।

सम्पूर्ण यात्रा के दौरान ओम स्वामी के मार्गदर्शन तथा जाग्रत मंत्रोच्चार उपलब्ध होने के कारण इसे पूर्ण करने के लिए किसी व्यक्तिगत गुरु की आवश्यकता नहीं है।

यदि तंत्र तथा शक्ति का मार्ग आपको आकर्षित करता है, तो इस सुलभ सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएँ, जो इससे पूर्व कभी उपलब्ध नहीं थी।

माँ की कृपा को जागृत करें। परमात्मा के प्रेम में निमग्न हो जाएँ।
माँ केवल उन्हीं को बुलाती हैं जो उनकी उपासना के लिए तैयार होते हैं। यदि आप यहाँ हैं, तो आप तैयार हैं। दशमहाविद्याओं को जागृत करें। और भक्ति में आरोह करें।

Frequently Asked Questions

तंत्र में साधना क्या है?

तंत्र में साधना एक सुव्यवस्थित, क्रमबद्ध, चरण-दर-चरण, अनुशासित अभ्यास है, जिसमें यम, नियम, आसन, प्रत्याहार, प्राणायाम, बीज मंत्र जप, अनुष्ठानिक उपासना (आवाह्य देवता की उपचार-पूजा, यंत्र-पूजा, न्यास तथा मुद्रा), धारणा (अन्तर्मुखीकरण), ध्यान तथा समाधि (अद्वैत चेतना) सम्मिलित हैं। इसका उद्देश्य अन्तर्निहित आद्याशक्ति की जागृति, अन्तःकरण की शुद्धि तथा अपने वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार करके जीवन्मुक्ति (जीवित रहते हुए समस्त बन्धनों से मुक्ति) की प्राप्ति है।

तंत्र के ७ चरण क्या हैं?

पतंजलि योगसूत्र के अनुसार, केवल तंत्र ही नहीं, अपितु किसी भी साधना के ७ चरण हैं—शुद्धीकरण, दीक्षा, मंत्र साधना, अनुष्ठानिक उपासना, अन्तर्मुखीकरण, ध्यान तथा समाधि (अद्वैत चेतना)।

तंत्र की ५ वस्तुएँ क्या हैं?

पंचमकार के नाम से प्रसिद्ध, तंत्र साधना में प्रयुक्त ५ तत्त्व हैं—मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा (धान्य) तथा मैथुन।

तंत्र के ४ प्रकार क्या हैं?

तंत्र साधना के केवल ४ नहीं, अपितु ६ पारम्परिक प्रकार हैं—वामाचार, दक्षिणाचार, मिश्राचार, कौलाचार, समयाचार तथा दिव्याचार।

सर्वाधिक शक्तिशाली तंत्र साधना कौन सी है?

श्रीविद्या साधना को तंत्र में व्यापक रूप से सर्वोच्च शक्ति साधना माना जाता है।