इस लेख में आप पढ़ेंगे :
दशमहाविद्या स्तोत्र का महत्त्व
दशमहाविद्या स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
दशमहाविद्या स्तोत्र के बोल — हिंदी में
दशमहाविद्या स्तोत्र के पाठ के लाभ
‘तंत्र साधना’ ऐप के माध्यम से उन सभी की उपासना करें

दशमहाविद्या स्तोत्र का महत्त्व
दशमहाविद्याएँ कौन हैं?
दशमहाविद्याएँ तंत्र की १० आद्य ज्ञानस्वरूपा देवियाँ हैं। हिंदू तंत्र और शाक्तमत में सभी एक ही जगन्माता (आदिपराशक्ति) की अद्वितीय अभिव्यक्तियाँ हैं।
प्रत्येक महाविद्या एक विशिष्ट ब्रह्मांडीय आदिरूप और परम आत्मसाक्षात्कार का एक मार्ग है, जो उग्र संहार से सृष्टि और पारमार्थिक निस्तब्धता तक, संपूर्ण वास्तविकता को समेटे हुए है।
१० देवियाँ हैं :
माँ काली (काल और ब्रह्मांडीय विलय)
माँ तारा (करुणामयी मार्गदर्शन और मुक्ति)
माँ त्रिपुर सुंदरी (परम सौंदर्य और परम सत्य)
माँ भुवनेश्वरी (आकाश और भौतिक रूप से प्रकट ब्रह्मांड)
माँ भैरवी (रूपांतरकारी उग्रता और आध्यात्मिक अनुशासन)
माँ छिन्नमस्ता (आत्मबलिदान और अहंकार का छेदन)
माँ धूमावती (शून्य, क्षय और त्याग)
माँ बगलामुखी (नकारात्मकता और अपरिष्कृत वाणी का स्तंभन)
माँ मातंगी (अपरंपरागत कलाएँ और गूढ़ ज्ञान)
माँ कमलात्मिका (लौकिक और आध्यात्मिक प्रचुरता तथा समृद्धि)
दशमहाविद्या स्तोत्र क्या है?
दशमहाविद्या स्तोत्र एक पवित्र भक्तिपरक संस्कृत स्तुति है, जो सभी १० महाविद्याओं के नामों, स्वरूपों और गुणों का क्रमबद्ध रूप से आवाहन, स्तवन और ध्यान करती है।
विभिन्न शाक्त आगमों और तंत्रों में प्राप्त—विशेषतः मुंडमाला तंत्र में—यह स्तोत्र दशमहाविद्याओं के ध्यान श्लोकों की एक क्रमिक श्रृंखला के रूप में कार्य करता है।
मुख्यतः शास्त्रीय ३२-अक्षरी अनुष्टुप् छंद (प्रत्येक चरण में आठ अक्षर) में रचित, यह संपूर्ण शाक्त ब्रह्मांडीय तत्त्वज्ञान को एक ही समन्वित स्तोत्र में संकलित करता है, जिसका प्रतिदिन सरलता से पाठ किया जा सकता है।
दशमहाविद्या स्तोत्र की विशिष्टता यह है कि यह मन का अस्तित्व के सौम्यऔर उग्र, दोनों पक्षों के साथ क्रमबद्ध रूप से सामंजस्य स्थापित कराता है, क्षय (माँ काली) से प्रचुरता (माँ कमलात्मिका) तक।
दशमहाविद्या स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
उन्नत तांत्रिक साधना के लिए अपेक्षित तांत्रिक दीक्षा और गुरु के मार्गदर्शन जैसी अनुष्ठानिक पूर्वापेक्षाओं की अपेक्षा करने के स्थान पर दशमहाविद्या स्तोत्र देवी उपासकों को दशमहाविद्याओं की दिव्य शक्तियों से जुड़ने का एक सुगम प्रवेशद्वार प्रदान करता है।
अधिकांश स्तोत्रों की भाँति, यह मूलतः एक भक्तिपरक स्तोत्र है, जो शुद्ध श्रद्धा और समर्पण के माध्यम से कार्य करता है। फलतः, यह जगन्माता के सभी सत्यनिष्ठ भक्तों के लिए उपयुक्त और लाभकारी है, जिनमें सम्मिलित हैं :
पुरुष और स्त्रियाँ दोनों
गृहस्थ
विश्वभर के आध्यात्मिक साधक
तंत्र के मार्ग का अन्वेषण करने वाले आरंभिक साधक
दशमहाविद्या उपासना में प्रगति के लिए तांत्रिक गुरु की खोज कर रहे साधक
दशमहाविद्या स्तोत्र के बोल — हिंदी में
स्तोत्र को बाद में पुनः पढ़ने हेतु उसकी पी-डी-एफ़ डाउनलोड करें :
ऊँ नमस्ते चण्डिके चण्डि चण्डमुण्डविनाशिनी ।
नमस्ते कालिके कालमहाभयविनाशिनि ।।१।।
शिवे रक्ष जगद्धात्रि प्रसीद हरवल्लभे ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं जगत्पालनकारिणीम् ।।२।।
जगत् क्षोभकरीं विद्यां जगत्सृष्टिविधायिनीम् ।
करालां विकटां घोरां मुण्डमालाविभूषिताम् ।।३।।
हरार्चितां हराराध्यां नमामि हरवल्लभाम् ।
गौरीं गुरुप्रियां गौरवर्णालंकारभूषिताम् ।।४।।
हरिप्रियां महामायां नमामि ब्रह्मपूजिताम् ।
सिद्धां सिद्धेश्वरीं सिद्धविद्याधरगणैर्युताम् ।।५।।
मन्त्रसिद्धिप्रदां योनिसिद्धिदां लिंगशोभिताम् ।
प्रणमामि महामायां दुर्गां दुर्गतिनाशिनीम् ।।६।।
उग्रामुग्रमयीमुग्रतारामुग्रगणैर्युताम्।
नीलां नीलघनश्यामां नमामि नीलसुन्दरीम् ।।७।।
श्यामांगी श्यामघटितां श्यामवर्णविभूषिताम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं गौरीं सर्वार्थसाधिनीम् ।।८।।
विश्वेश्वरीं महाघोरां विकटां घोरनादिनीम् ।
आद्यामाद्यगुरोराद्यामाद्यनाथप्रपूजिताम् ।।९।।
श्री दुर्गां धनदामन्नपूर्णां पद्मां सुरेश्वरीम् ।
प्रणमामि जगद्धात्रीं चन्द्रशेखरवल्लभाम् ।।१०।।
त्रिपुरां सुन्दरीं बालामबलागणभूषिताम् ।
शिवदूतीं शिवाराध्यां शिवध्येयां सनातनीम् ।।११।।
सुन्दरीं तारिणीं सर्वशिवागणविभूषिताम् ।
नारायणीं विष्णुपूज्यां ब्रह्मविष्णुहरप्रियाम् ।।१२।।
सर्वसिद्धिप्रदां नित्यामनित्यां गुणवर्जिताम् ।
सगुणां निर्गुणां ध्येयामर्चितां सर्वसिद्धिदाम् ।।१३।।
विद्यां सिद्धिप्रदां विद्यां महाविद्यां महेश्वरीम् ।
महेशभक्तां माहेशीं महाकालप्रपूजिताम् ।।१४।।
प्रणमामि जगद्धात्रीं शुम्भासुरविमर्दिनीम् ।
रक्तप्रियां रक्तवर्णां रक्तबीजमर्दिनीम् ।।१५।।
भैरवीं भुवनां देवीं लोलजिह्वां सुरेश्वरीम् ।
चतुर्भुजां दशभुजामष्टादशभुजां शुभाम् ।।१६।।
त्रिपुरेशीं विश्वनाथप्रियां विश्वेश्वरीं शिवाम् ।
अट्टहासामट्टहासप्रियां धूम्रविनाशिनीम् ।।१७।।
कमलां छिन्नभालांच मातंगी सुरसुन्दरीम् ।
षोडशीं विजयां भीमां धूमांच वगलामुखीम् ।।१८।।
सर्वसिद्धिप्रदां सर्वविद्यामन्त्रविशोधिनीम् ।
प्रणमामि जगत्तारां सारांच मन्त्रसिद्धये ।।१९।।
इत्येवंच वरारोहे, स्तोत्रं सिद्धिकरं परम् ।
पठित्वा मोक्षमाप्नोति सत्यं वै गिरिनन्दिनि ।।२०।।
श्रीमुण्डमालातन्त्रे एकादशपटले महाविद्यास्तोत्रम् ।
दशमहाविद्या स्तोत्र के पाठ के लाभ
यहाँ दशमहाविद्या स्तोत्र की फलश्रुति दी गई है, जिसमें इसके पाठ से प्राप्त होने वाले लाभों का विस्तृत वर्णन है :
|| फलश्रुति ||
इत्येवंच वरारोहे स्तोत्रं सिद्धिकरं परम् ।
पठित्वा मोक्षमाप्नोति सत्यं वै गिरिनन्दिनी ।।१।।
कुजवारे चतुर्द्दश्याममायां जीववासरे ।
शुक्रे निशिगते स्तोत्रं पठित्वा मोक्षमाप्नुयात् ।।२।।
त्रिपक्षे मंत्रसिद्धिः स्यात्स्तोत्रपाठाद्धि शंकरि।
चतुर्द्दश्यां निशाभागे शनिभौमदिने तथा ।।३।।
निशामुखे पठेत्स्तोत्रं मंत्रसिद्धिमवाप्नुयात्।
केवलं स्तोत्रपाठाद्धि मंत्रसिद्धिरनुत्तमा ।
जागर्तिं सततं चण्डी स्तोत्रपाठाद्भुजंगिनी ।।४।।
अनुवाद
हे कुलीन महिला [वरारोहे]! यह प्रिय स्तव परम सिद्धि देने वाला है।
हे पर्वत की पुत्री [गिरिनन्दिनी]! इसका पाठ करने से वास्तव में मोक्ष प्राप्त होता है।
मंगलवार [कुजवारे] की चतुर्दशी तिथि में, गुरुवार [जीववासरे] की अमावस्या तिथि में या शुक्रवार निशा काल में यह स्तुति पढ़ने से मोक्ष प्राप्त होता है।
हे शंकरि! तीन सप्ताह [त्रिपक्षे] तक इस स्तव के पढ़ने से मंत्र सिद्धि होती है।
चौदश की रात में तथा शनि और मंगलवार [शनिभौमदिने] की संध्या के समय इस स्तव का पाठ करने से मंत्र सिद्धि होती है।
जो व्यक्ति केवल इस स्तोत्र को पढ़ता है, वह परम मंत्र सिद्धि को प्राप्त करता है।
चण्डी के इस स्तव के फल से कुल-कुण्डलिनी शक्ति का निरंतर जागरण होता है।
‘तंत्र साधना’ ऐप के माध्यम से उन सभी की उपासना करें
हिमालय की पवित्र निस्तब्धता में संन्यासी ओम स्वामी द्वारा जन्मी, पूर्णतः निःशुल्क और विज्ञापन-रहित 'तंत्र साधना' ऐप जगन्माता के रहस्यमय पथ पर चलने वाले प्रत्येक भक्तिपरायण साधक के लिए दशमहाविद्याओं के प्रकाशमय लोकों के द्वार खोलता है।
दिव्याचार के पवित्र मार्ग में प्रतिष्ठित, समस्त उपासना पूर्णतः मानसिक है और बाह्य, भौतिक अर्पणों की आवश्यकता से परे है। इस उच्च आंतरिक मार्ग के माध्यम से इन प्राचीन अनुष्ठानों में स्वयं सिद्धि प्राप्त करने के पश्चात्, ओम स्वामी ने उनके समस्त जागृत मंत्रों को अपने ही स्वर में रिकार्ड किया है।
क्योंकि प्रत्येक अनुष्ठान को अत्यंत सूक्ष्मता से 'कोड' किया गया है और स्वामीजी के प्रत्यक्ष स्वर-निर्देशों द्वारा चरण-दर-चरण मार्गदर्शित किया जाता है, इसलिए व्यक्तिगत गुरु के बिना भी निष्ठावान आरंभिक साधक इस गहन आध्यात्मिक यात्रा में पूर्ण सुरक्षा और समुचित अनुकूलता के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
यह ऐप साधक को विस्मयकारी और पूर्णतः तन्मयकारी ‘थ्री-डी’ लोकों के माध्यम से एक विस्तृत, रूपांतरणकारी तीर्थयात्रा पर ले जाती है।
माँ काली के उग्र, रूपांतरणकारी आलिंगन से लेकर माँ कमलात्मिका की स्वर्णिम कृपा तक की यात्रा में, साधक प्रत्येक पावन लोक में लगभग १-२ मास तक निमग्न रहते हैं।
वहाँ, वे निर्धारित संख्या में तांत्रिक मंत्र जप, यज्ञ और गुह्य साधना पूर्ण करके संबंधित महाविद्याओं की दिव्य उपस्थिति को जागृत करते हैं।
तंत्र जगन्माता की कृपा प्राप्त करने का सर्वाधिक सामर्थ्यवान मार्ग है। अब अपने घर के सुख-सुविधापूर्ण वातावरण से ही इसका अनुसरण करें।