प्रामाणिक तांत्रिक की पहचान कैसे करें
इस लेख में आप पढ़ेंगे :
प्रामाणिक तांत्रिक कैसा होता है
प्रामाणिक तांत्रिक और ढोंगी तंत्र गुरु में भेद कैसे करें
वास्तविक तांत्रिक साधकों के ३ प्रकार
'तंत्र साधना' ऐप : महाविद्या उपासना का सर्वाधिक सुरक्षित प्रवेशद्वार
प्रामाणिक तांत्रिक कैसा होता है
तंत्र का साधक तांत्रिक कहलाता है। तंत्र का उद्देश्य अनुशासित आध्यात्मिक साधना के माध्यम से जीवात्मा का परमात्मा के साथ ऐक्य स्थापित करना है।
प्रामाणिक तांत्रिक निष्कपट साधना तथा आन्तरिक शुद्धीकरण के द्वारा इसी जन्म में परमात्मा के साथ ऐक्य प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। उनका लक्ष्य मन के इन ६ शत्रुओं पर विजय प्राप्त करना होता है :
काम
क्रोध
लोभ
मद
मोह
मात्सर्य
धन, यश अथवा अलौकिक शक्तियों के प्रदर्शन की कामना करने के स्थान पर, वास्तविक तांत्रिक स्वयं को पूर्णतः आत्मविजय तथा अहंकार एवं द्वैत के लय के लिए समर्पित कर देते हैं।
अन्ततः वे समस्त सृष्टि में दिव्य उपस्थिति का साक्षात्कार करते हुए परमचैतन्य के साथ एकत्व प्राप्त करते हैं।
वर्तमान युग में तांत्रिक
वर्तमान कलियुग में प्रामाणिक तांत्रिक वह है जो कीचड़ में खिलने वाले कमल की भाँति संसार की अशुद्धियों से ऊपर उठा हुआ होता है। उसकी पहचान उसके बाह्य स्वरूप—जैसे जटाएँ धारण करना अथवा सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए रहस्यमय चमत्कारों का प्रदर्शन करना—से नहीं होती।
असहाय लोग जीवन के कष्टों से मुक्ति की आशा में तांत्रिकों के पास जाते हैं, और कुछ कपटी तांत्रिक इन दुर्बलताओं का लाभ उठाकर इस पवित्र परम्परा का व्यक्तिगत तथा आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग करते हैं।
इसके विपरीत, प्रामाणिक तांत्रिक का जीवन सर्वथा भिन्न होता है। यह प्रचलित है कि सच्चा तांत्रिक समाज में वैष्णव, उपासना में शैव और एकान्त में शाक्त होता है।
वास्तव में, जब कोई सच्चा तांत्रिक आपके सम्मुख बैठा हो, तब संभवतः आपको यह ज्ञात भी न हो कि वह तांत्रिक है। क्योंकि वह अपनी पहचान अथवा सिद्धियों का प्रदर्शन करने का प्रयत्न नहीं करता।
प्रामाणिक तांत्रिक और छद्म तंत्र गुरु में भेद कैसे करें
निम्नलिखित बिन्दु किसी प्रामाणिक तांत्रिक साधक और तंत्र के नाम का व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति के मध्य भेद करने में सहायक हो सकते हैं।
१. सरलता और सत्यवादिता
प्रामाणिक तांत्रिक सत्य, करुणा, निष्कपटता तथा सरलता पर आधारित जीवन व्यतीत करता है। उसका ध्यान सदैव आध्यात्मिक अभ्यास तथा सत्यनिष्ठ मार्गदर्शन पर केन्द्रित रहता है, और वह साधना के माध्यम से निरन्तर प्रगति के लिए प्रेरित करता है। उसका जीवन पारदर्शी होता है और वह अन्य लोगों के साथ छल-कपट नहीं करता।
इसके विपरीत, एक ढोंगी तंत्र गुरु अपने अनुयायियों पर नियन्त्रण रखने के लिए धमकी, छल-कपट अथवा भय का आश्रय ले सकता है।
२. तंत्र तथा शास्त्रों का गहन ज्ञान
सच्चा तांत्रिक मंत्रों, अनुष्ठानों तथा तांत्रिक शास्त्रों का गहन ज्ञान रखता है। वह अन्धविश्वास की अपेक्षा नहीं करता, अपितु आध्यात्मिक साधनाओं का स्पष्ट तथा विचारपूर्ण विवेचन प्रस्तुत कर सकता है।
इसके विपरीत, एक छद्म तंत्रगुरु प्रायः वास्तविक ज्ञान से वंचित होता है और अनुष्ठानों का औचित्य सिद्ध करने तथा धन प्राप्त करने के लिए अस्पष्ट दावों अथवा भय-आधारित कथनों का आश्रय लेता है।
३. ऐसा मार्गदर्शन जो भय नहीं, अपितु शान्ति का संचार करे
प्रामाणिक तांत्रिक के सम्पर्क में आने पर साधक प्रायः स्पष्टता, शान्ति तथा आन्तरिक आश्वस्ति का अनुभव करते हैं।
इसके विपरीत, कपटी तांत्रिक प्रायः भय अथवा अन्धविश्वास का वातावरण उत्पन्न करते हैं, जिससे लोगों को यह विश्वास हो जाए कि महँगे उपाय अथवा अनुष्ठान आवश्यक हैं।
४. अनुशासन तथा भक्ति
वास्तविक तांत्रिक अनुशासन तथा भक्ति से अनुप्राणित जीवन व्यतीत करता है। उसकी दैनिक साधनाएँ, आचरण तथा आध्यात्मिक सिद्धान्तों के प्रति निष्ठा उसके मार्ग की प्रामाणिकता को प्रतिबिम्बित करती हैं।
जटाएँ, असामान्य वस्त्र, मादक द्रव्यों का सेवन अथवा नाटकीय अनुष्ठान जैसे बाह्य रूप किसी वास्तविक तांत्रिक की पहचान नहीं हैं।
५. साधना पर केन्द्रित, धन पर नहीं
वास्तविक तांत्रिक के लिए प्रमुख केन्द्र साधना तथा आध्यात्मिक उन्नति होती है, धनार्जन नहीं। यद्यपि मार्गदर्शन के अन्तर्गत कभी-कभी परम्परानुसार अर्पण सम्मिलित हो सकते हैं, तथापि उनका प्रमुख उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं, अपितु साधक का कल्याण ही रहता है।
इसके विपरीत, छद्म तंत्रगुरु अपने शिष्यों की आध्यात्मिक मुक्ति की अपेक्षा अपनी आय को अधिक महत्त्व देता है। वस्तुतः वह अपने शिष्यों को जानबूझकर अपने ऊपर आश्रित बनाए रखता है, ताकि वह निरन्तर अधिकाधिक धन अर्जित करता रहे।
६. प्रामाणिक आध्यात्मिक परम्परा
सत्यनिष्ठ तांत्रिक सामान्यतः किसी गुरु-शिष्य परम्परा का होता है। सिद्ध गुरु से प्राप्त दीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि साधनाएँ प्रामाणिकता तथा शुद्धता के साथ संचारित हों, जिससे परम्परा की अखण्डता सुरक्षित बनी रहे।
ऐसी सत्यापनीय गुरु-परम्परा के बिना स्वयं को तांत्रिक घोषित करने वाले व्यक्ति को तंत्रमार्ग पर साधकों का मार्गदर्शन करने के लिए अधिकृत नहीं माना जाता।
आज भी अनेक लोग ‘तंत्र’ अथवा ‘तांत्रिक’ शब्द को अन्धविश्वास अथवा काले जादू से सम्बद्ध मानते हैं। किन्तु तंत्र भगवान शिव से सम्बद्ध एक आध्यात्मिक मार्ग है, जिसका उद्देश्य साधकों को गहनतर आत्मबोध की ओर अग्रसर करना है।
यद्यपि यह मार्ग तीव्र अथवा अपरम्परागत प्रतीत हो सकता है, तथापि यह न तो अविवेकपूर्ण है और न ही अव्यवस्थित। तंत्र एक सूक्ष्म, सुव्यवस्थित तथा अत्यन्त विवेकपूर्ण आध्यात्मिक विज्ञान है, जिसका उद्देश्य साधक के अन्तःकरण का रूपान्तरण करना है।
वास्तविक तांत्रिक साधकों के ३ प्रकार
तांत्रिक परम्परा में प्रामाणिक साधकों का वर्गीकरण प्रायः साधक की आध्यात्मिक परिपक्वता तथा आन्तरिक पात्रता के आधार पर तीन प्रकारों में किया जाता है।
पशु भाव
इस अवस्था में साधक अभी भी मूलप्रवृत्तियों अथवा पशुतुल्य वृत्तियों से अत्यधिक प्रभावित रहता है। ऐसे साधकों के लिए प्रमुख निर्देश यह होता है कि वे यथासम्भव प्रलोभन के इन्द्रिय-विषयों से दूर रहें तथा शुद्धता और आत्मसंयम का कठोर पालन करते हुए मंत्र जप जैसी अनुशासित आध्यात्मिक साधनाओं पर ध्यान केन्द्रित करें।
वीर भाव
यह अवस्था अधिक उन्नत साधक का द्योतक है। यहाँ साधक की ईश्वर-भक्ति इन्द्रिय-विषयों के आकर्षण से अधिक प्रबल होने लगती है। ऐसे साधकों को संसार में रहते हुए भी ईश्वर के प्रति अखंड सजगता बनाए रखने का निर्देश दिया जाता है, जिससे बाह्य विक्षेप उनके आन्तरिक एकाग्र भाव को विचलित न कर सकें।
दिव्य भाव
इसे साधना की सर्वोच्च अवस्था माना जाता है। इस स्तर पर साधक इन्द्रिय-प्रेरणाओं के प्रभाव से ऊपर उठ चुका होता है तथा ईश्वर-साक्षात्कार की तीव्र अभिलाषा में पूर्णतः निमग्न रहता है। वह मन और इन्द्रियों के समस्त विक्षेपों का अतिक्रमण करके स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक चेतना में स्थित रहता है।
‘तंत्र साधना’ ऐप : महाविद्या उपासना का सर्वाधिक सुरक्षित प्रवेशद्वार
कल्पना करें कि आप ऐसे पथ पर प्रथम चरण रख रहे हैं, जहाँ प्राचीन, आदिम अनुग्रह अब गोपनीयता के आवरण में सीमित नहीं है, बल्कि आपकी हथेली में प्रत्यक्ष उपलब्ध है।
‘तंत्र साधना’ऐप एक सुरक्षित, पूर्णतः निःशुल्क तथा विज्ञापन-मुक्त प्रवेशद्वार है, जिसे आपको चरण-दर-चरण दशमहाविद्याओं (१० ज्ञानस्वरूपा देवियों) के दिव्य हृदय तक पहुँचाने के लिए निर्मित किया गया है—माँ काली के उग्र किन्तु मुक्तिदायिनी प्रेम से लेकर माँ कमलात्मिका की तेजोमयी समृद्धि तक।
इस ऐप में प्रत्येक मंत्र केवल ध्वन्यांकित नहीं है; वह सजीव है। हिमालयी संन्यासी ओम स्वामी, जिन्होंने दिव्याचार (मानसिक उपासना) के पवित्र मार्ग द्वारा समस्त दशमहाविद्याओं की साधनाओं में सिद्धि प्राप्त की, उन्होंने इस ऐप में सम्मिलित प्रत्येक मंत्र का स्वयं आह्वान किया है।
इस पथ पर अग्रसर होते हुए आप दस मनोहारी ‘वर्चुअल’ लोकों की यात्रा करते हैं, जिनमें से प्रत्येक जगन्माता के एक तांत्रिक स्वरूप को समर्पित है। यहाँ संरचित मंत्र जप, यज्ञ तथा साधना के माध्यम से आप जगन्माता की प्रत्यक्ष उपस्थिति तथा रूपान्तरकारी कृपा को जागृत करते हैं।
चाहे आप अपना प्रथम चरण रख रहे हों अथवा तंत्र के रहस्यमय प्रवाहों में पहले से ही गहन रूप से प्रविष्ट हों, यह ऐप आपके लिए है—शास्त्रसम्मत तथा माँ तक पहुँचने का प्रत्यक्ष पथ।