# नवरात्रि उपासना : इसका आचरण करने वाले ऋषि और इसके तांत्रिक मार्ग
Published: 2026-03-13
Category: Hindi
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Meta Title: नवरात्रि उपासना : इसका आचरण करने वाले ऋषि और इसकी तांत्रिक परंपराएँ
Meta Description: नवरात्रि उपासना की तांत्रिक परम्परा, देवी साधना का आचरण करने वाले ऋषियों-मुनियों तथा नवमी तिथि पर माँ मातंगी और सिद्धिदात्री के आध्यात्मिक महत्त्व का अन्वेषण करें।
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### इस लेख में आप पढ़ेंगे :

- तांत्रिक परंपरा में नवरात्रि उपासना की वंशावली

- कौल और नाथ परंपराओं में नवरात्रि

- माँ मातंगी — दिव्य अभिव्यक्ति का परिष्कार

- माँ मातंगी का नवदुर्गा, देवी सिद्धिदात्री के साथ संबंध

- इस चैत्र नवरात्रि माँ मातंगी की उपासना करें


चैत्र नवरात्रि शक्ति की जागृति की एक क्रमबद्ध यात्रा है, जो आंतरिक परिवर्तन के नौ चरणों से होकर जाती है। प्रत्येक दिन जगन्माता के एक विशेष रूप से संबंधित है और साधक की आध्यात्मिक चेतना में एक परिवर्तन को दर्शाता है।

- [**दिन १ — माँ काली**](https://tantrasadhana.app/blog/chaitra-navratri-and-the-das-mahavidyas-hindi) **:** जड़ता और अहंकार का विनाश

- [**दिन २ — माँ तारा**](https://tantrasadhana.app/blog/chaitra-navratri-awakening-ma-through-das-mahavidyas-hindi) **:** परिवर्तन के दौरान मार्गदर्शन

- [**दिन ३ — माँ त्रिपुर सुंदरी**](https://tantrasadhana.app/blog/mool-durga-and-the-worship-of-the-divine-mother-hindi) **:** संतुलन और समरसता का उद्भव

- [**दिन ४ — माँ भुवनेश्वरी**](https://tantrasadhana.app/blog/chaitra-navratri-invoking-the-devi-who-rules-worlds-hindi) **:** चेतना का ब्रह्मांडीय विस्तार

- [**दिन ५ — माँ भैरवी**](https://tantrasadhana.app/blog/origins-of-navratri-ma-bhairavis-fire-of-purification-hindi) **:** अनुशासन और तप की जागृति

- [**दिन ६ — माँ छिन्नमस्ता**](https://tantrasadhana.app/blog/why-worship-divine-mother-on-navratri-principles-hindi) **:** अहंकार का छेदन और प्राण-शक्ति का पुनर्निर्देशन

- [**दिन ७ — माँ धूमावती**](https://tantrasadhana.app/blog/methods-of-navratri-worship-ma-dhumavati-cosmic-void-hindi) **:** अनित्यता की अनुभूति और वैराग्य

- [**दिन ८ — माँ बगलामुखी**](https://tantrasadhana.app/blog/seeking-the-divine-goddess-in-the-women-in-our-lives-hindi) **:** वाणी, विचार और कर्म पर नियंत्रण

- **दिन ९ — माँ मातंगी :** ज्ञान, वाणी और दिव्य बुद्धि का परिष्कार


नौवें दिन तक साधक उस अवस्था में पहुँचता है जहाँ जागृत शक्ति परिष्कृत होकर ज्ञान, वाणी और आंतरिक जागरूकता की स्पष्टता के रूप में व्यक्त होती है।

## **तांत्रिक परंपरा में नवरात्रि उपासना की वंशावली**

नवरात्रि उपासना की जड़ें **तांत्रिक और पौराणिक, दोनों परंपराओं** में गहराई से स्थापित हैं। अनेक ऋषियों और आध्यात्मिक परंपराओं ने देवी उपासना की संरचित विधियों को संरक्षित और प्रसारित किया।

### ऋषि दुर्वासा और श्रीविद्या परंपरा

**ऋषि दुर्वासा** को **श्रीविद्या** के प्रारंभिक और प्रमुख आचार्यों में माना जाता है, जो ललिता त्रिपुर सुंदरी की तांत्रिक उपासना से संबंधित है।

परंपरागत मान्यता के अनुसार उन्होंने :

- **ललिता उपासना** का ज्ञान प्राप्त किया

- **श्रीचक्र पूजा** का प्रचार किया

- **देवी साधना** के सुसंगठित चक्र सिखाए


कई **श्रीविद्या तांत्रिक पद्धतियाँ** नवरात्रि के दौरान देवी की विशेष उपासना का विधान करती हैं, जिसे **दुर्वासा क्रम** कहा जाता है। इस कारण उन्हें तांत्रिक नवरात्रि साधना की प्रमुख पारंपरिक कड़ी माना जाता है।

### ऋषि अगस्त्य और ललितोपाख्यान परंपरा

**ब्रह्माण्ड पुराण** के **ललितोपाख्यान संवाद** में वर्णन मिलता है कि **ऋषि अगस्त्य** को ललिता उपासना की गुप्त शिक्षाएँ प्राप्त हुईं।

इस संवाद में :

- भगवान **हयग्रीव** अगस्त्य को श्रीविद्या की महिमा बताते हैं

- **देवी उपासना** और मंत्र साधना की विधियाँ समझाई जाती हैं


नवरात्रि की कई अनुष्ठानिक परंपराएँ प्रतीकात्मक रूप से **अगस्त्य–हयग्रीव संचरण** से जुड़ी मानी जाती हैं।

इस कारण अगस्त्य को निम्न क्षेत्रों में एक प्रमुख आचार्य माना जाता है :

- मंत्र शास्त्र की परंपराएँ

- देवी उपासना की विधियाँ

- दक्षिण भारत की श्रीविद्या तंत्र की धाराएँ


### ऋषि मतंग और मातंगी उपासना की उत्पत्ति

**पुरश्चर्या अर्णव** और **तंत्रसार** के अनुसार, **ऋषि मतंग** ने जगन्माता को समर्पित कठोर तपस्या की और **देवी मातंगी** की कृपा प्राप्त की।

यद्यपि ग्रंथों में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि उन्होंने नवरात्रि अनुष्ठान किए, किंतु उनकी साधना में सम्मिलित थे :

- देवी साधना

- मंत्र पुरश्चरण के चक्र

- महाविद्या उपासना


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## **कौल और नाथ परंपराओं में नवरात्रि**

**कौल तांत्रिक परंपरा** और **नाथ संप्रदाय** में भी नवरात्रि की रात्रि-साधनाओं पर विशेष बल दिया जाता है।

इन परंपराओं के प्रारंभिक महान आचार्यों में **मत्स्येन्द्रनाथ** का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

इन परंपराओं में विशेष रूप से निम्न साधनाएँ प्रमुख हैं :

- रात्रि में केंद्रित शक्ति उपासना

- महाविद्या साधना के चक्र

- नवरात्रि के समय आंतरिक आध्यात्मिक साधनाएँ


इस प्रकार, नवरात्रि को **तांत्रिक आध्यात्मिक साधना** के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली कालखंड माना जाता है।

**कालिका पुराण** में भी देवी के **अकाल बोधन** अर्थात् समय से पूर्व जागृति का वर्णन मिलता है।

एक श्लोक में कहा गया है :

> _ऐं रावणस्य वधार्थाय रामस्यानुग्रहाय च ।_
>
> _अकाले ब्रह्मणा बोधो देव्यास्त्वयि कृतः पुरा ॥_
>
> **अर्थ :**“हे देवी, रावण के वध हेतु राम पर कृपा करने के लिए ब्रह्मा ने आपको समय से पहले जागृत किया था।”

यह कथा आज प्रचलित कई नवरात्रि परंपराओं का आधार मानी जाती है।

## **माँ मातंगी — दिव्य अभिव्यक्ति का परिष्कार**

नवरात्रि के नौवें दिन जगन्माता **माँ मातंगी** के रूप में प्रकट होती हैं।

![देवी मातंगी का मानक मूर्तिशास्त्रीय चित्रण।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-1773392142102-compressed.png)स्रोत : drikpanchang.com

वे इनका प्रतिनिधित्व करती हैं :

- आंतरिक वाणी

- पवित्र ज्ञान

- मंत्र और ध्वनि की सिद्धि


तांत्रिक ग्रंथों में उन्हें प्रायः **तांत्रिक माँ सरस्वती** के रूप में वर्णित किया जाता है।

आध्यात्मिक यात्रा के इस चरण में :

- साधक अब शुद्धिकरण के संघर्ष से आगे बढ़ चुका होता है

- मन परिष्कृत और स्थिर हो जाता है

- साधना आंतरिक और सहज हो जाती है


माँ मातंगी **कंपन और अभिव्यक्ति की सूक्ष्म शक्ति** का संचालन करती हैं, जो मन के शुद्ध होने के बाद प्रकट होती है।

तंत्र साधना का आरंभ करें

## **माँ मातंगी का नवदुर्गा, देवी सिद्धिदात्री के साथ संबंध**

नवरात्रि में अंतिम नवदुर्गा रूप **देवी सिद्धिदात्री** का पूजन किया जाता है।

![देवी सिद्धिदात्री का मानक मूर्तिशास्त्रीय चित्रण।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-1773391822719-compressed.png)स्रोत : sadhana.app

वे इनका प्रतिनिधित्व करती हैं :

- आध्यात्मिक सिद्धि

- आध्यात्मिक यात्रा की पूर्णता

- दिव्य प्रज्ञा की प्राप्ति


उनकी ऊर्जा **माँ मातंगी** से संरेखित है, जो परिष्कृत ज्ञान और पवित्र वाणी की अधिष्ठात्री हैं।

दोनों मिलकर इनका प्रतिनिधित्व करते हैं :

- दिव्य ज्ञान का प्रस्फुटन

- मंत्र सिद्धि

- आध्यात्मिक यात्रा की पूर्णता


## **माँ मातंगी का बीज मंत्र**

माँ मातंगी से संबंधित प्रमुख **बीज मंत्र** है :

**ऐं**

**मंत्र महोदधि** का एक श्लोक कहता है :

> _ऐं बीजं मातङ्ग्याः सर्वविद्याप्रदायकम् ।_
>
> **अर्थ :**“ऐं मातंगी का बीज मंत्र है — समस्त विद्या प्रदान करने वाला।”

**‘ऐं’** ध्वनि उच्चतर बुद्धि, परिष्कृत वाणी और आध्यात्मिक प्रज्ञा की जागृति का प्रतिनिधित्व करती है।

## **इस चैत्र नवरात्रि माँ मातंगी की उपासना करें**

चैत्र नवरात्रि का नौवाँ दिन उस अवस्था का प्रतीक है जहाँ आध्यात्मिक ज्ञान पूर्ण रूप से परिष्कृत हो जाता है।

शुद्धिकरण, मार्गदर्शन, समरसता, विस्तार, अनुशासन, अहंकार-परिवर्तन, वैराग्य और स्थिरता के चरणों के बाद साधक **माँ मातंगी** की परिष्कृत प्रज्ञा तक पहुँचता है।

उनकी शिक्षाएँ इनपर बल देती हैं :

- वाणी और मंत्र पर प्रभुत्व

- ज्ञान का परिष्कार

- दिव्य प्रज्ञा की अभिव्यक्ति


उनकी कृपा से साधक नवरात्रि की यात्रा के अंतिम चरण के निकट पहुँचता है — दिव्य ज्ञान और आध्यात्मिक सिद्धि की प्राप्ति।

इस चैत्र नवरात्रि में **हिमालयी संन्यासी ओम स्वामी** द्वारा निर्मित **'तंत्र साधना' ऐप** शक्ति साधकों के लिए अपने **गुप्त शक्तिपीठ** के द्वार खोलता है।

नवरात्रि के प्रत्येक दिन यह शक्तिपीठ साधकों को किसी एक महाविद्या के **ध्यान श्लोक और मूल बीज मंत्र** का जप करने का अवसर देता है। ये श्लोक और मंत्र, जिन्हें ओम स्वामी द्वारा जागृत तथा अभिषिक्त किया गया है, साधना को शक्तिशाली, सुरक्षित तथा शास्त्रसम्मत बनाते हैं।

१५ अप्रैल २०२७ को आपकी चैत्र नवरात्रि साधना पूर्ण होने के पश्चात् आप दशमहाविद्याओं की उपासना भी आरम्भ कर सकते हैं, जिसमें प्रत्येक महाविद्या को उनके तांत्रिक बीज मंत्र और गूढ़ साधना के माध्यम से एक-एक करके जागृत किया जाता है — माँ काली से लेकर माँ कमलात्मिका तक।

यह ऐप पूर्णतः **निःशुल्क और विज्ञापन-रहित** है, जिसमें दक्षिणा पूर्णतः वैकल्पिक है।

दशमहाविद्याओं की चैत्र नवरात्रि आरम्भ होती है **६ अप्रैल २०२७ की अमावस्या से।**

गुप्त शक्तिपीठ में प्रवेश करके माँ मातंगी की उपासना उनके ध्यान श्लोक तथा मूल बीज मंत्र के साथ करें।

दशमहाविद्याओं की कृपा से यह चैत्र नवरात्रि आपके जीवन में रूपान्तरणकारी काल सिद्ध हो।

माँ की कृपा को जागृत करें। परमात्मा के प्रेम में निमग्न हो जाएँ।

माँ केवल उन्हीं को बुलाती हैं जो उनकी उपासना के लिए तैयार होते हैं। यदि आप यहाँ हैं, तो आप तैयार हैं। दशमहाविद्याओं को जागृत करें। और भक्ति में आरोह करें।

[माँ की कृपा को जागृत करें](https://tantra-sadhana-app.onelink.me/jgcg/24u3wjsu)


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