माँ काली आपको पुकार रही हैं – इसके ७ संकेत

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  • माँ काली आपको पुकार रही हैं – इसके ७ संकेत

  • 'तंत्र साधना' ऐप के माध्यम से माँ काली का आवाहन

तांत्रिक शास्त्रों के दृष्टिकोण से, “माँ काली आपको पुकार रही हैं” इस विचार का वर्णन सामान्यतः किसी नाटकीय अलौकिक घटना के रूप में नहीं किया जाता। इसके स्थान पर, ग्रन्थ प्रायः देवी के अनुग्रह को आत्मा को क्रमशः मुक्ति की ओर जागृत करने वाली प्रक्रिया के रूप में निरूपित करते हैं।

तंत्र में माँ काली साधक के समक्ष केवल बाह्य रूप से प्रकट नहीं होतीं। वे चित्ति के रूप में भीतर से जागृत होती हैं — वह आद्य चैतन्य-शक्ति, जो आत्मा पर पड़े आवरणों का विलयन आरम्भ कर देती है।

अतः माँ काली की पुकार का वर्णन शास्त्रों में प्रायः सुख-सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि आन्तरिक उथल-पुथल, तप की अग्नि में अंतर्दाह, उच्चतर सत्य के प्रति आकर्षण तथा अनित्यता के साथ एक विलक्षण आत्मीयता के रूप में किया गया है, जो अंततः वैराग्य की प्रबल अनुभूति उत्पन्न करती है।

अतः इसके संकेत बाह्य की अपेक्षा अधिक आन्तरिक होते हैं।

देवी दक्षिणकाली का एक सुसज्जित विग्रह।
स्रोत : pexels.com

माँ काली आपको पुकार रही हैं – इसके ७ संकेत

१. वैराग्य का आकस्मिक उदय

अनेक तांत्रिक ग्रन्थों में कहा गया है कि जब देवी प्रसन्न होती हैं, तब सांसारिक आकर्षण अपनी पकड़ खोने लगते हैं। साधक कामना, उपलब्धि और निराशा के अनन्त चक्रों पर प्रश्न उठाने लगता है।

इस संदर्भ में प्रायः उद्धृत किया जाने वाला प्रसिद्ध कौल वचन कहता है :

यदा प्रसन्ना भवति कुलदेवी महेश्वरी ।
तदा वैराग्यमायाति नात्र कार्या विचारणा ॥

"जब कुल की महादेवी प्रसन्न होती हैं, तब वैराग्य का उदय होता है; इसमें तनिक भी संशय नहीं है।"

यह माँ काली की कृपा से संबद्ध सर्वाधिक गहन पारम्परिक संकेतों में से एक है। साधक को अचानक अनुभव होने लगता है कि सामान्य भोग, व्यर्थ वार्तालाप, प्रतिस्पर्धा अथवा सामाजिक आवरण अब उसके हृदय को संतुष्ट नहीं करते।

बाह्य रूप से संसार वैसा ही बना रह सकता है, परंतु भीतर कुछ टूट जाता है। अनेक साधक इस अवस्था का वर्णन एक मौन विषाद के रूप में करते हैं — अवसाद नहीं, बल्कि वह पीड़ादायक अनुभूति कि सांसारिक अनुभव आत्मा की गहनतम तृष्णा को तृप्त नहीं कर सकते।

तांत्रिक सिद्धों ने प्रायः माँ काली के आगमन का प्रथम संकेत वैराग्याग्नि — अर्थात् वैराग्य की अग्नि — को बताया है।

इसका अर्थ जीवन का परित्याग करना नहीं है। अपितु साधक समस्त वस्तुओं की क्षणभंगुर प्रकृति को देखने लगता है और साथ ही किसी गहनतर सत्य की खोज करने लगता है।

माँ काली स्वयं कालस्वरूपा हैं, और उनका प्रथम आशीर्वाद प्रायः वैराग्य होता है। देवी माहात्म्य में उनकी स्तुति भयावहा और करुणामयी माता, दोनों रूपों में की गई है।

जब माँ काली का प्रभाव जागृत होने लगता है, तब साधक विनाश और समाप्ति में भी दिव्यता का दर्शन करने लगता है।

२. प्रामाणिकता और सत्य के लिए आन्तरिक आह्वान

माँ काली का संबंध सत्य और प्रामाणिकता से है। यदि आप अपने जीवन में प्रामाणिक रूप से जीने तथा सत्य की खोज करने के लिए एक प्रबल आन्तरिक आह्वान अनुभव करते हैं, तो यह उनकी प्रभावना का एक संकेत हो सकता है।

एक समय ऐसा आता है जब सुविधा की अपेक्षा सत्य के लिए तीव्र अभिलाषा जागृत होती है।

तांत्रिक मार्ग केवल बौद्धिक मान्यता की अपेक्षा प्रत्यक्ष अनुभूति को अधिक महत्त्व देता है।

माँ काली की कृपा का एक संकेत वह आन्तरिक प्रार्थना है, जो कुछ इस प्रकार सुनाई देती है :

"मुझे सत्य का दर्शन कराएँ, चाहे वह मेरे जीवन को परिवर्तित ही क्यों न कर दे।"

साधक भ्रमजनित संतोष में कम और वास्तविक आध्यात्मिक अनुभूति में अधिक रुचि लेने लगता है।

महाविद्या परम्पराओं में माँ काली का वर्णन प्रायः उस देवी के रूप में किया गया है, जो अज्ञान, अहंकार और मिथ्या तादात्म्य का छेदन करती हैं। अतः उनकी कृपा यथार्थ के प्रति एक गहन पिपासा के रूप में प्रकट होती है।

३. माँ काली के स्वरूपों, मंत्रों तथा दिव्य नामों के प्रति सहज आकर्षण

तांत्रिक ग्रन्थों में बार-बार कहा गया है कि मंत्र जप का आरम्भ देवी की अपनी ही इच्छा से होता है।

साधक अचानक निम्नलिखित के प्रति आकर्षण अनुभव कर सकता है :

  • माँ काली के मंत्र

  • महाविद्याओं के स्तोत्र

  • देवी माहात्म्य

  • तांत्रिक ग्रन्थ

  • रात्रिकालीन उपासना

  • अमावस्या के व्रत एवं अनुष्ठान

साधक अनुभव कर सकता है कि साधना अब उस पर आरोपित प्रतीत नहीं होती, बल्कि स्वाभाविक रूप से भीतर से उदित होने लगती है। सम्भव है कि उसने पूर्वजन्मों में उनके मंत्रों का जप किया हो, और इसलिए वे ऐसे साधक के लिए सहज रूप से आकर्षक प्रतीत होते हैं, क्योंकि आध्यात्मिक संपदा जन्म-जन्मान्तरों में ठीक उसी बिन्दु से आगे बढ़ती है जहाँ साधना पूर्व में विराम पर पहुँची थी।

कौल परम्पराएँ प्रायः इस अवस्था का वर्णन इस प्रकार करती हैं कि शक्ति स्वयं अपने प्रति भक्ति को जागृत करती हैं।

यदि आप माँ काली का आह्वान अनुभव करते हैं, तो उनके शास्त्रीय ग्रन्थों, उपदेशों और साधनाओं का अधिक गहन अध्ययन करना हितकारी हो सकता है, जिससे आप अपने लिए उनके वास्तविक संदेश को समझ सकें।

कौल साहित्य में वर्णित एक अत्यंत गहन संकेत है मंत्र जप के प्रति ऐसा अनिवार्य आकर्षण, विशेषतः रात्रिकाल में, जिसका प्रतिरोध करना कठिन हो जाता है।

रुद्रयामल तंत्र में देवी की विशेष उपस्थिति निम्न स्थानों और अवस्थाओं में बताई गई है :

  • मौन

  • श्मशान

  • चौराहे

  • अर्धरात्रि की उपासना

  • आन्तरिक निस्तब्धता

एक पारम्परिक तांत्रिक वचन कहता है :

निशा शक्तेः प्रिया देवी ॥

"रात्रि देवी को अत्यंत प्रिय है।"

माँ काली के प्रति आकर्षण जागृत होने के पश्चात साधक प्रायः :

  • रात्रि १२ बजे से प्रातः ४ बजे के मध्य स्वाभाविक रूप से जाग उठते हैं

  • उनके मंत्रों का जप करने के लिए भीतर से प्रेरित अनुभव करते हैं

  • "क्रीं" अथवा काली स्तोत्रों का श्रवण करते समय भावविभोर हो उठते हैं

  • अंधकार और एकान्त में एक अव्याख्येय शान्ति का अनुभव करते हैं

सामान्य चेतना में अंधकार भय उत्पन्न करता है। माँ काली की उपस्थिति में वही अंधकार मातृवत् अनुभव होने लगता है।

४. मिथ्या पहचान का विनाश

महानिर्वाण तंत्र में माँ काली का वर्णन करुणामयी माता तथा बन्धनों का विनाश करने वाली देवी, दोनों रूपों में किया गया है :

सा एव सृष्टिः सा देवी
सा संहारकरी परा ॥

"वे ही देवी सृष्टि हैं; वे ही परम संहारकारिणी हैं।"

जब माँ काली की शक्ति किसी साधक के जीवन में कार्य करना आरम्भ करती है, तब छिपे हुए भय, आसक्तियाँ और भ्रांतियाँ प्रायः तीव्र रूप से सतह पर आने लगती हैं।

असत्य पर आधारित संबंध टूट सकते हैं। अहंकार से प्रेरित व्यवसाय अथवा महत्त्वाकांक्षाएँ अचानक अपना अर्थ खो सकती हैं। साधक स्वयं को संसार द्वारा परित्यक्त अनुभव कर सकता है।

किन्तु तंत्र इसकी व्याख्या सामान्य दुःख के रूप में नहीं करता। माँ काली को श्मशानवासिनी कहा गया है — अर्थात् वे जो श्मशान में निवास करती हैं।

क्योंकि वे अहंकार को भस्म कर देती हैं, भ्रांतियों का ग्रास कर लेती हैं, और परम सत्य का उद्घाटन करने से पूर्व मिथ्या पहचानों को पूर्णतः दूर कर देती हैं — और वह परम सत्य स्वयं वे ही हैं।

५. मृत्यु और अनित्यता के प्रति निर्भयता

माँ काली की ओर गहराई से आकर्षित साधक प्रायः एक रहस्यमय परिवर्तन अनुभव करते हैं :

  • जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के प्रति गहन विस्मय

  • मृत्यु का चिन्तन

  • श्मशान सम्बन्धी प्रतीकों के प्रति आकर्षण

  • यह जानने की तीव्र अभिलाषा कि शरीर और अहंकार से परे क्या विद्यमान है

तांत्रिक दृष्टि से यह किसी प्रकार की विषादग्रस्त प्रवृत्ति नहीं है। वास्तव में, माँ समस्त अस्थायी वस्तुओं की अनित्यता को प्रत्यक्ष करके साधक की चेतना को शाश्वत तत्त्व की ओर उन्मुख करती हैं।

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की एक फ़ोटो।
स्रोत : prokerala.com

माँ काली अपनी कृपा से साधक को परिपूर्ण करने से पूर्व उसके पात्र को रिक्त करती हैं।

कालिका पुराण भी माँ काली की कृपा को मृत्यु और अनित्यता के प्रति निर्भयता से सम्बद्ध करता है।

एक पारम्परिक श्लोक कहता है :

मृत्युभीति विनाशिन्यै कालिकायै नमो नमः ॥

"मृत्यु के भय का विनाश करने वाली कालिका को पुनः पुनः नमस्कार।”

६. सजीव स्वप्न एवं सांकेतिक दर्शन

योगिनी तंत्र तथा कौल ग्रन्थ स्वप्नों को उन सूक्ष्म माध्यमों में से एक मानते हैं, जिनके द्वारा देवी साधक के साथ संवाद करती हैं।

शाक्त परम्पराओं में प्रचलित एक श्लोक कहता है :

स्वप्ने देवीदर्शनं सिद्धिलक्षणम् ॥

"स्वप्न में देवी का दर्शन आध्यात्मिक सिद्धि का एक लक्षण है।"

किन्तु तांत्रिक ग्रन्थ यह भी स्पष्ट करते हैं कि माँ काली प्रायः पूर्वानुमेय रूपों में प्रकट नहीं होतीं। उनकी उपस्थिति साधना की सफल पूर्णता के उपरांत निम्नलिखित प्रकार के सांकेतिक रूपों में प्रकट हो सकती है :

  • अंधकारमयी नदियाँ

  • प्रचण्ड आंधियाँ

  • कपाल

  • सर्प

  • रक्तवर्णी जवा पुष्प

  • श्मशान

  • मंदिर

  • चन्द्रमा

  • सियार

  • स्त्री-तत्त्व की अत्यंत प्रबल उपस्थिति

साधक स्वप्नों में मंत्रों का श्रवण भी कर सकते हैं, अपरिचित तपस्वियों का दर्शन कर सकते हैं, अथवा बिना किसी पूर्व अभिप्राय के बार-बार माँ काली के मंदिरों या शक्तिपीठों की ओर आकृष्ट हो सकते हैं।

विशेष रूप से कामाख्या मंदिर की परम्पराओं में प्रवाहित लाल जल, गुफाओं अथवा दिव्य स्त्री-शक्ति से संबंधित स्वप्नों को शक्ति-जागरण के संकेतों के रूप में वर्णित किया गया है।

७. माँ काली के प्रति भक्ति-भाव का प्रबल उद्रेक

बंगाल के शाक्त संतों, अघोरियों तथा कौल साधकों के अनेक वृत्तांत एक अंतिम संकेत का वर्णन करते हैं — जप अथवा दर्शन के समय स्वतः अश्रुपात और हृदय का द्रवित हो उठना।

हृदय अचानक माँ काली के प्रति उसी गहन आत्मीयता और प्रेम से भर उठता है, जैसा एक बालक अपनी माता के संरक्षणमय सान्निध्य में अनुभव करता है।

साधक उनके उग्र स्वरूप को देखकर भी अनुभव कर सकता है :

  • भय के स्थान पर सुरक्षा

  • आतंक के स्थान पर मिलन की उत्कण्ठा

  • यह विलक्षण निश्चय कि — "वे मुझे सदा से जानती रही हैं।"

अहंकार के लिए वे भयावहा प्रतीत होती हैं।

आत्मा के लिए वे माँ के रूप में प्रकट होती हैं।

देवी काली का एक चित्रण, जिसमे वे मातृवत, करुणामयी दिख रही हैं।
स्रोत : pinterest.com

इसी कारण महान बंगाली संत श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के समक्ष अश्रुपूर्ण हो उठते थे और कहते थे : "माँ, तुम ही सब कुछ हो।"

तांत्रिक शास्त्र यह शिक्षा नहीं देते कि प्रत्येक स्वप्न, संयोग, कौआ, काला श्वान, नरमुंड की छवि अथवा कोई असामान्य घटना इस बात का संकेत है कि माँ काली आपको पुकार रही हैं। ऐसी व्याख्याएँ अधिकांशतः आधुनिक लोकमान्यताओं का भाग हैं।

इन संकेतों के प्रति खुले मन और विवेक के साथ दृष्टि रखना महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक साधक का अनुभव विशिष्ट होता है, जो उसके स्वभाव तथा माँ काली के साथ उसके पूर्वजन्मगत संबंधों पर निर्भर करता है।

शास्त्रों में विशेष रूप से जिन पारम्परिक संकेतों पर बल दिया गया है, वे हैं :

  • वैराग्य

  • मुक्ति की अभिलाषा

  • साधना के प्रति आकर्षण

  • विकसित होती प्रज्ञा

  • जगन्माता के प्रति भक्ति

  • आन्तरिक रूपांतरण

कौल परम्परा की दृष्टि में माँ काली किसी व्यक्ति को पुकार रही हैं इसका सबसे महान संकेत कोई बाह्य शकुन नहीं, बल्कि एक आन्तरिक जागृति है — जब हृदय क्षणभंगुर वस्तुओं से विमुख होकर उस शाश्वत जननी की ओर उन्मुख होने लगता है, जो समस्त लोकों की सृष्टिकर्त्री भी हैं और संहारकारिणी भी।

जैसा कि महाविद्या परम्पराएँ प्रायः उपदेश देती हैं :

जब माँ काली की कृपा अवतरित होती है, तब वे सर्वप्रथम अपने अन्वेषण की अभिलाषा जागृत करती हैं। वह अभिलाषा ही उनका आह्वान है।

'तंत्र साधना' ऐप के माध्यम से माँ काली का आवाहन करें

दशमहाविद्याएँ (तंत्र की १० ज्ञानस्वरूपा देवियाँ) जगन्माता की अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक अभिव्यक्तियाँ हैं, जिनका आरम्भ माँ काली से होता है और समापन माँ कमलात्मिका पर।

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यदि आप ऊपर वर्णित संकेतों का अनुभव कर रहे हैं, तो यह माँ काली के साथ उनके प्रिय मार्ग — तंत्र — के माध्यम से एक गहन और अटूट संबंध स्थापित करने का अवसर है।

'तंत्र साधना' ऐप के एक थ्री-डी परिवेश का स्क्रीनशॉट।
स्रोत : Tantra Sadhana App

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जगन्माता का सर्वाधिक उग्र स्वरूप आपके भय, अज्ञान और विपत्तियों को भस्म कर दे।

जय माँ!

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