# श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र — हिंदी में
Published: 2026-08-26
Category: Hindi
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Meta Title: श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र — हिंदी में
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### इस लेख में आप पढ़ेंगे :

- श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र क्या है

- श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र के बोल — हिंदी में

- ‘तंत्र साधना’ ऐप पर श्री चक्र पूजा


![श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र पर लेख के लिए मुख्य चित्र, जिसमें एक स्त्री श्री यंत्र की उपासना करती हुई दिखाई गई है।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/geminigeneratedimagew1cs2ww1cs2ww1cs-1-1787741364443-compressed.png)

## श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र क्या है?

**श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र** एक पवित्र हिन्दू स्तोत्र है, जिसका उद्गम **वामकेश्वर तंत्र** से हुआ है और जो **श्रीविद्या** के जटिल गूढ़ अनुष्ठानों को संक्षिप्त रूप में समाहित करता है। श्रीविद्या वह प्रमुख शाक्त परम्परा है, जो **माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी** के रूप में जगन्माता को समर्पित है।

_खड्ग_ का अर्थ तलवार है और _माला_ का अर्थ हार है। इस प्रकार, संस्कृत शब्द _खड्गमाला_ दिव्य ज्ञान की तलवारों की माला का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक अज्ञान ( _अविद्या_), भ्रम ( _माया_) और अहंकार को काट देती है।

परम्परागत रूप से **श्री यंत्र (अथवा श्री चक्र)** के माध्यम से देवी की उपासना करने के लिए **नवावरण पूजा** की आवश्यकता होती है—एक विस्तृत अनुष्ठान, जिसमें इसके ९ संकेन्द्रित आवरणों में निवास करने वाले १०० से अधिक देवियों का आवाहन करने में कई घंटे लगते हैं।

खड्गमाला स्तोत्र एक शक्तिशाली, सुगम विकल्प के रूप में कार्य करता है, जो किसी भी व्यक्ति को केवल कुछ ही मिनटों में, यहाँ तक कि मानसिक रूप से भी, इस सम्पूर्ण अनुष्ठान को सम्पन्न करने की अनुमति देता है।

!['तंत्र साधना' ऐप से लिया गया देवी त्रिपुर सुंदरी का एक चित्र।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-cp-1787740914802-compressed.png)देवी त्रिपुर सुंदरी

संरचनात्मक रूप से यह स्तोत्र निर्देशित मानसिक उपासना ( _मानस पूजा_) के रूप में कार्य करता है, जो श्री चक्र के सबसे बाहरी वर्गाकार आवरण (भूपुर) से आरम्भ होकर केन्द्रबिन्दु की ओर अग्रसर होता है, जहाँ माँ त्रिपुर सुंदरी **भगवान शिव के कामेश्वर रूप** के साथ विराजमान रहती हैं।

अनुष्ठान की सुगमता से परे, खड्गमाला स्तोत्र मानव शरीर-विज्ञान और मनोविज्ञान से सम्बन्धित गहन गूढ़ अर्थ भी धारण करता है। श्रीविद्या दर्शन में श्री चक्र यंत्र केवल एक बाह्य रेखाचित्र नहीं है, बल्कि साधक के अपने शरीर और मन का एक सूक्ष्म प्रतिरूप है।

आवाहित देवियाँ आन्तरिक ऊर्जाओं, इन्द्रियों, चक्रों और मानसिक शक्तियों से सम्बन्धित हैं। स्तोत्र का पाठ करके साधक अपनी व्यक्तिगत चेतना को सार्वभौमिक ऊर्जा के साथ संरेखित करता है, जिससे उसका आन्तरिक सूक्ष्म शरीर शुद्ध होता है और कर्मजन्य अवरोध दूर होते हैं।

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## श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र के बोल — हिंदी में

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### श्री देवी प्रार्थन

ह्रीङ्कारासनगर्भितानलशिखां सौः क्लीं कलां बिभ्रतीं

सौवर्णाम्बरधारिणीं वरसुधाधौतां त्रिनेत्रोज्ज्वलाम् ।

वन्दे पुस्तकपाशमङ्कुशधरां स्रग्भूषितामुज्ज्वलां

त्वां गौरीं त्रिपुरां परात्परकलां श्रीचक्रसञ्चारिणीम् ॥

**अस्य श्री शुद्धशक्तिमालामहामन्त्रस्य,**

उपस्थेन्द्रियाधिष्ठायी

वरुणादित्य ऋषयः

देवी गायत्री छन्दः

सात्विक ककारभट्टारकपीठस्थित कामेश्वराङ्कनिलया महाकामेश्वरी श्री ललिता भट्टारिका देवता,

ऐं बीजं

क्लीं शक्तिः

सौः कीलकं

मम खड्गसिद्ध्यर्थे सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः

मूलमन्त्रेण षडङ्गन्यासं कुर्यात् ।

### ध्यानम्

तादृशं खड्गमाप्नोति येन हस्तस्थितेनवै ।

अष्टादश महाद्वीप सम्राट् भोक्ता भविष्यति ॥

आरक्ताभां त्रिणेत्रामरुणिमवसनां रत्नताटङ्करम्यां

हस्ताम्भोजैस्सपाशाङ्कुश मदन धनुस्सायकैर्विस्फुरन्तीम् ।

आपीनोत्तुङ्ग वक्षोरुह कलशलुठत्तार हारोज्ज्वलाङ्गीं

ध्यायेदम्भोरुहस्था-मरुणिमवसना-मीश्वरीमीश्वराणाम् ॥

**लमित्यादिपञ्च पूजां कुर्यात्, यथाशक्ति मूलमन्त्रं जपेत् ।**

लं \- पृथिवीतत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै गन्धं परिकल्पयामि \- नमः

हं \- आकाशतत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै पुष्पं परिकल्पयामि \- नमः

यं \- वायुतत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै धूपं परिकल्पयामि \- नमः

रं \- तेजस्तत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै दीपं परिकल्पयामि \- नमः

वं \- अमृततत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै अमृतनैवेद्यं परिकल्पयामि \- नमः

सं \- सर्वतत्त्वात्मिकायै श्री ललितात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिकायै ताम्बूलादिसर्वोपचारान् परिकल्पयामि \- नमः

### श्री देवी सम्बोधनं (१ )

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः ॐ नमस्त्रिपुरसुन्दरी,

न्यासाङ्गदेवताः (६)

हृदयदेवी, शिरोदेवी, शिखादेवी, कवचदेवी, नेत्रदेवी, अस्त्रदेवी,

तिथिनित्यादेवताः (१६)

कामेश्वरी, भगमालिनी, नित्यक्लिन्ने, भेरुण्डे, वह्निवासिनी, महावज्रेश्वरी, शिवदूती, त्वरिते, कुलसुन्दरी, नित्ये, नीलपताके, विजये, सर्वमङ्गले, ज्वालामालिनी, चित्रे, महानित्ये,

दिव्यौघगुरवः (७)

परमेश्वर, परमेश्वरी, मित्रेशमयी, षष्ठीशमयी, चर्यानाथमयी, लोपामुद्रमयी, अगस्त्यमयी,

सिद्धौघगुरवः (४)

कालतापशमयी, धर्माचार्यमयी, मुक्तकेशीश्वरमयी, दीपकलानाथमयी,

मानवौघगुरवः (८)

विष्णुदेवमयी, प्रभाकरदेवमयी, तेजोदेवमयी, मनोजदेवमयि, कल्याणदेवमयी, वासुदेवमयी, रत्नदेवमयी, श्रीरामानन्दमयी,

श्रीचक्र प्रथमावरणदेवताः

अणिमासिद्धे, लघिमासिद्धे, गरिमासिद्धे, महिमासिद्धे, ईशित्वसिद्धे, वशित्वसिद्धे, प्राकाम्यसिद्धे, भुक्तिसिद्धे, इच्छासिद्धे, प्राप्तिसिद्धे, सर्वकामसिद्धे, ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारि, वैष्णवी, वाराही, माहेन्द्री, चामुण्डे, महालक्ष्मी, सर्वसङ्क्षोभिणी, सर्वविद्राविणी, सर्वाकर्षिणी, सर्ववशङ्करी, सर्वोन्मादिनी, सर्वमहाङ्कुशे, सर्वखेचरी, सर्वबीजे, सर्वयोने, सर्वत्रिखण्डे, त्रैलोक्यमोहन चक्रस्वामिनी, प्रकटयोगिनी,

श्रीचक्र द्वितीयावरणदेवताः

कामाकर्षिणी, बुद्ध्याकर्षिणी, अहङ्काराकर्षिणी, शब्दाकर्षिणी, स्पर्शाकर्षिणी, रूपाकर्षिणी, रसाकर्षिणी, गन्धाकर्षिणी, चित्ताकर्षिणी, धैर्याकर्षिणी, स्मृत्याकर्षिणी, नामाकर्षिणी, बीजाकर्षिणी, आत्माकर्षिणी, अमृताकर्षिणी, शरीराकर्षिणी, सर्वाशापरिपूरक चक्रस्वामिनी, गुप्तयोगिनी,

श्रीचक्र तृतीयावरणदेवताः

अनङ्गकुसुमे, अनङ्गमेखले, अनङ्गमदने, अनङ्गमदनातुरे, अनङ्गरेखे, अनङ्गवेगिनी, अनङ्गाङ्कुशे, अनङ्गमालिनी, सर्वसङ्क्षोभणचक्रस्वामिनी, गुप्ततरयोगिनी,

श्रीचक्र चतुर्थावरणदेवताः

सर्वसङ्क्षोभिणी, सर्वविद्राविनी, सर्वाकर्षिणी, सर्वह्लादिनी, सर्वसम्मोहिनी, सर्वस्तम्भिनी, सर्वजृम्भिणी, सर्ववशङ्करी, सर्वरञ्जनी, सर्वोन्मादिनी, सर्वार्थसाधिके, सर्वसम्पत्तिपूरिणी, सर्वमन्त्रमयी, सर्वद्वन्द्वक्षयङ्करी, सर्वसौभाग्यदायक चक्रस्वामिनी, सम्प्रदाययोगिनी,

श्रीचक्र पञ्चमावरणदेवताः

सर्वसिद्धिप्रदे, सर्वसम्पत्प्रदे, सर्वप्रियङ्करी, सर्वमङ्गलकारिणी, सर्वकामप्रदे, सर्वदुःखविमोचनी, सर्वमृत्युप्रशमनि, सर्वविघ्ननिवारिणी, सर्वाङ्गसुन्दरी, सर्वसौभाग्यदायिनी, सर्वार्थसाधक चक्रस्वामिनी, कुलोत्तीर्णयोगिनी,

श्रीचक्र षष्टावरणदेवताः

सर्वज्ञे, सर्वशक्ते, सर्वैश्वर्यप्रदायिनी, सर्वज्ञानमयी, सर्वव्याधिविनाशिनी, सर्वाधारस्वरूपे, सर्वपापहरे, सर्वानन्दमयी, सर्वरक्षास्वरूपिणी, सर्वेप्सितफलप्रदे, सर्वरक्षाकरचक्रस्वामिनी, निगर्भयोगिनी,

श्रीचक्र सप्तमावरणदेवताः

वशिनी, कामेश्वरी, मोदिनी, विमले, अरुणे, जयिनी, सर्वेश्वरी, कौलिनि, सर्वरोगहरचक्रस्वामिनी, रहस्ययोगिनी,

श्रीचक्र अष्टमावरणदेवताः

बाणिनी, चापिनी, पाशिनी, अङ्कुशिनी, महाकामेश्वरी, महावज्रेश्वरी, महाभगमालिनी, सर्वसिद्धिप्रदचक्रस्वामिनी, अतिरहस्ययोगिनी,

श्रीचक्र नवमावरणदेवताः

श्री श्री महाभट्टारिके, सर्वानन्दमयचक्रस्वामिनी, परापररहस्ययोगिनी,

नवचक्रेश्वरी नामानि

त्रिपुरे, त्रिपुरेशी, त्रिपुरसुन्दरी, त्रिपुरवासिनी, त्रिपुराश्रीः, त्रिपुरमालिनी, त्रिपुरसिद्धे, त्रिपुराम्बा, महात्रिपुरसुन्दरी,

श्रीदेवी विशेषणानि \- नमस्कारनवाक्षरीच

महामहेश्वरी, महामहाराज्ञी, महामहाशक्ते, महामहागुप्ते, महामहाज्ञप्ते, महामहानन्दे, महामहास्कन्धे, महामहाशये, महामहा श्रीचक्रनगरसाम्राज्ञी, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमः ।

दशमहाविद्याओं की उपासना करें

### फलश्रुतिः

एषा विद्या महासिद्धिदायिनी स्मृतिमात्रतः ।

अग्निवातमहाक्षोभे राजाराष्ट्रस्यविप्लवे ॥

लुण्ठने तस्करभये सङ्ग्रामे सलिलप्लवे ।

समुद्रयानविक्षोभे भूतप्रेतादिके भये ॥

अपस्मारज्वरव्याधिमृत्युक्षामादिजेभये ।

शाकिनी पूतनायक्षरक्षःकूष्माण्डजे भये ॥

मित्रभेदे ग्रहभये व्यसनेष्वाभिचारिके ।

अन्येष्वपि च दोषेषु मालामन्त्रं स्मरेन्नरः ॥

तादृशं खड्गमाप्नोति येन हस्तस्थितेनवै ।

अष्टादशमहाद्वीपसम्राड्भोक्ताभविष्यति ॥

सर्वोपद्रवनिर्मुक्तस्साक्षाच्छिवमयोभवेत् ।

आपत्काले नित्यपूजां विस्तारात्कर्तुमारभेत् ॥

एकवारं जपध्यानं सर्वपूजाफलं लभेत् ।

नवावरणदेवीनां ललिताया महौजनः ॥

एकत्र गणनारूपो वेदवेदाङ्गगोचरः ।

सर्वागमरहस्यार्थः स्मरणात्पापनाशिनी ॥

ललितायामहेशान्या माला विद्या महीयसी ।

नरवश्यं नरेन्द्राणां वश्यं नारीवशङ्करम् ॥

अणिमादिगुणैश्वर्यं रञ्जनं पापभञ्जनम् ।

तत्तदावरणस्थायि देवताबृन्दमन्त्रकम् ॥

मालामन्त्रं परं गुह्यं परं धाम प्रकीर्तितम् ।

शक्तिमाला पञ्चधास्याच्छिवमाला च तादृशी ॥

तस्माद्गोप्यतराद्गोप्यं रहस्यं भुक्तिमुक्तिदम् ॥

**॥ इति श्री वामकेश्वरतन्त्रे उमामहेश्वरसंवादे देवीखड्गमालास्तोत्ररत्नं समाप्तम् ॥**

## ‘तंत्र साधना’ ऐप पर श्री चक्र पूजा

कल्पना करें कि आप भौतिक जगत की सीमा को पार करके १० विस्मयकारी, सजीव 'थ्री-डी' लोकों में प्रवेश कर रहे हैं। ये ‘तंत्र साधना’ ऐप पर ब्रह्माण्डीय मंदिर हैं दशमहाविद्याओं के, उग्र माँ काली से लेकर दीप्तिमयी माँ कमलात्मिका तक।

उनके पथ पर चलना कठोर अनुशासन और अटल भक्ति के मार्ग पर चलना है। प्रत्येक लोक में साधक माँ के एक शक्तिशाली स्वरूप को जागृत करने के लिए १-२ महीने **तांत्रिक मंत्र जप**, **तांत्रिक** **यज्ञ** और गहन गूढ़ **साधना** के चक्रों का अनुष्ठान करता है।

फिर भी, इस रूपान्तरण के लिए न किसी भौतिक वेदी की आवश्यकता है, न एकत्र किए गए पुष्पों की। **दिव्याचार** के मार्ग पर पूर्णतः आधारित, प्रत्येक अनुष्ठान मन के भीतर सम्पन्न होता है। ऐप में स्पन्दित होने वाला प्रत्येक दिव्य मंत्र ओम स्वामी ने अपनी स्वयं की तीव्र साधना में जागृत किया और अपने गुंजयमान स्वर में रिकार्ड किया है।

उनके निर्देशों द्वारा पूर्णतः मार्गदर्शित होकर, व्यक्तिगत गुरु के बिना आरम्भिक साधक भी इस शक्तिशाली पथ पर सुरक्षित रूप से, विधिपूर्वक और गहन एकाग्रता के साथ चल सकते हैं।

![श्री यंत्र का एक रंगीन चित्रण।](https://prod.superblogcdn.com/site_cuid_cmcefnv6x0009hoe0r2qjyjo4/images/image-cp-1787740918685-compressed.png)श्री यंत्र अथवा श्री चक्र \| स्रोत : en.wikipedia.org

ऐप का तृतीय लोक श्री यंत्र (अथवा श्री चक्र) की अधिष्ठात्री देवी **माँ त्रिपुर सुंदरी** को समर्पित है।

भीतर जप तथा यज्ञ के आवश्यक चक्र पूर्ण करने के उपरान्त, **श्री देवी खड्गमाला स्तोत्र** की सभी देवियों को मानसिक अर्पण करते हुए श्री यंत्र के माध्यम से माँ की उपासना की जाती है।

दिव्य कृपा प्राप्त करें तथा प्रथम २ महाविद्याओं, माँ काली और माँ तारा, के लोकों को पार करके अत्यन्त फलदायी **श्री यंत्र साधना** को सदैव के लिए अनावृत करें।

तंत्र की सर्वाधिक गुह्य पद्धतियों से माँ का आवाहन करें

जागृत मंत्रों का जप करें, तांत्रिक यज्ञों को संपन्न करें और उन गूढ़ साधनाओं को पूर्ण करें, जिन्हें सहस्रों वर्षों तक गुरु से शिष्य को गुप्त रूप से प्रदान किया गया था। अब ये सुलभ हैं। माँ को उनके १० तांत्रिक स्वरूपों में जागृत करें। परमात्मा के प्रेम में लीन हो जाएँ। और भक्ति में उन्नत हों।

[माँ का आवाहन करें](https://tantra-sadhana-app.onelink.me/jgcg/24u3wjsu)
## FAQs
Q: देवी खड्गमाला स्तोत्र का क्या उपयोग है?
A: <p><span>देवी खड्गमाला स्तोत्र श्री चक्र के माध्यम से एक मानसिक तीर्थयात्रा के रूप में कार्य करता है, जो विस्तृत अनुष्ठानों की आवश्यकता के बिना संरक्षण, शान्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। यह साधक को आन्तरिक बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जाओं और भयों का विनाश करने के लिए आध्यात्मिक रूप से “तलवारों की माला” (</span><em>खड्गमाला</em><span>) से सुसज्जित करता है।</span></p>

Q: देवी खड्गमाला का जप कौन कर सकता है?
A: <p><span>लिंग, पृष्ठभूमि अथवा आयु की चिंता किए बिना, कोई भी व्यक्ति सच्ची भक्ति और श्रद्धा के साथ देवी खड्गमाला स्तोत्र का जप कर सकता है। यद्यपि उन्नत श्रीविद्या अनुष्ठानों के लिए सामान्यतः औपचारिक दीक्षा</span><span>&nbsp;की आवश्यकता होती है, यह स्तोत्र सभी निष्ठावान साधकों के लिए सर्वसुलभ माना जाता है।</span></p>

Q: देवी खड्गमाला स्तोत्र का जप कैसे करें?
A: <p><span>स्नान के पश्चात इसका जप करना सर्वोत्तम माना जाता है, अधिमानतः प्रातःकाल अथवा सायंकाल की संध्या में, आराम से बैठकर और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके। एक दीपक अथवा धूप प्रज्वलित करें, स्थान को स्वच्छ रखें और स्पष्ट उच्चारण, एकाग्र मन तथा&nbsp;जगन्माता  के प्रति गहन श्रद्धा के साथ स्तोत्र का पाठ करें।</span></p>




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