तारा जयन्ती तथा राम नवमी २०२६ : सम्बन्ध, महत्त्व, तिथियाँ एवं समय

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इस लेख में आप पढ़ेंगे :

  • माँ तारा एवं भगवान राम का परस्पर सम्बन्ध

  • तारा जयन्ती

  • राम नवमी

  • वर्ष २०२६ में उनकी तिथि

  • 'तंत्र साधना' ऐप पर उपासना

तारा जयन्ती तथा राम नवमी चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिवस पर अपनी तिथियाँ साझा करती हैं। माँ तारा एक तांत्रिक हिन्दू देवी हैं, जो तांत्रिक शास्त्रों में वर्णित दशमहाविद्याओं (तंत्र की १० ज्ञान देवियाँ) के क्रम में द्वितीय स्थान धारण करती हैं। तथा भगवान विष्णु के दशावतारों (१० अवतारों) में सप्तम अवतार भगवान राम हैं।

माँ तारा एवं भगवान राम का परस्पर सम्बन्ध

अलप ही लोग जानते हैं कि माँ तारा एवं भगवान राम गहन रूप से परस्पर सम्बद्ध हैं, यद्यपि वे २ प्रतीततः भिन्न सम्प्रदायों — शाक्त तथा वैष्णव — के देवता माने जाते हैं। और यह संयोग मात्र नहीं है कि उनके जन्म/आविर्भाव की तिथियाँ समान हैं।

गुह्यति गुह्य तंत्र दशावतारों में से प्रत्येक को दशमहाविद्याओं में से एक के साथ सम्बद्ध करता है। उनमें भगवान राम का सम्बन्ध माँ तारा से स्थापित किया गया है। माँ तारा भगवान राम की उस संहारकारी शक्ति का मूल स्रोत मानी गई हैं, जिसके द्वारा राक्षसराज रावण का वध हुआ।

तारा जयन्ती

महाकाल संहिता में वर्णित विवरणों के अनुसार, तारा जयन्ती हिन्दू पंचांग में चैत्र शुक्ल नवमी की तिथि पर मनाई जाती है। अतः इस तिथि की रात्रि 'तारा-रात्रि' कहलाती है।

स्वतंत्र तंत्र के अनुसार, माँ तारा का प्रथम आविर्भाव मेरु पर्वत के पश्चिमी भाग में स्थित चोलना नदी अथवा चोलता सरोवर के तट पर हुआ।

माँ तारा के आविर्भाव से सम्बन्धित प्रचलित अनेक पौराणिक कथाओं में से हयग्रीव नामक एक मायावी असुर (भगवान विष्णु के अवतार नहीं) के वध से सम्बन्धित कथा सर्वाधिक प्रमुख मानी जाती है।

उसका वध एकमात्र कौन कर सकता है, उस वरदान की शर्त की पूर्ति करते हुए श्यामवर्णा देवी महाकाली नीलवर्णा होकर माँ तारा के रूप में प्रकट हुईं, और उस दैत्य के अत्याचारों का अंत करने हेतु उसका संहार किया।

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स्रोत : drikpanchang.com

राम नवमी

भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम अवतार भगवान राम, जिन्होंने रावण का वध किया, हिन्दू मास चैत्र के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अवतीर्ण हुए। अतः यह दिवस राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान राम का जन्म मध्याह्न के मध्य-बिन्दु पर हुआ, जो हिन्दू दिवस का मध्य भाग है। इसकी अवधि ६ घटी (लगभग २ घंटे २४ मिनट) की होती है।

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स्रोत : en.wikipedia.org

वर्ष २०२६ में उनकी तिथि

तारा जयन्ती

तारा जयन्ती — २६ मार्च २०२६ (गुरुवार)

नवमी तिथि प्रारम्भ — २६ मार्च को ११:४८ पूर्वाह्न

नवमी तिथि समाप्त — २७ मार्च को १०:०६ पूर्वाह्न

राम नवमी

राम नवमी — २६ मार्च २०२६ (गुरुवार)

राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त — २६ मार्च को ११:१३ पूर्वाह्न से १:४१ अपराह्न तक

राम नवमी मध्याह्न क्षण — २६ मार्च को १२:२७ अपराह्न

नवमी तिथि प्रारम्भ — २६ मार्च को ११:४८ पूर्वाह्न

नवमी तिथि समाप्त — २७ मार्च को १०:०६ पूर्वाह्न

'तंत्र साधना' ऐप पर उपासना

माँ तारा तंत्र में उद्धारिणी देवी के रूप में विख्यात हैं, क्योंकि वे विघ्नों का शीघ्र निवारण करती हैं तथा साधकों को उस दिव्य ज्ञान से आलोकित करती हैं, जो उन्हें संसारिक बन्धनों से मुक्ति की ओर ले जाता है।

तारा जयन्ती, जो चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिवस है, माँ तारा की उपस्थिति का आवाहन करने हेतु अत्यन्त शक्तिशाली तिथियों में से एक है।

अतः हिमालयी संन्यासी ओम स्वामी द्वारा निर्मित 'तंत्र साधना' ऐप उनका गुप्त शक्तिपीठ उपलब्ध करने जा रहा है, जहाँ साधक माँ तारा के ध्यान-श्लोक का जितनी बार इच्छित हो, निःशुल्क जप कर सकते हैं। जप करते समय आप ओम स्वामी की वाणी में उस जागृत श्लोक का श्रवण और पठन करते हैं।

सामान्यतः यह ऐप आपको एक पूर्वनिश्चित मार्ग पर ले जाती है, जहाँ आप दशमहाविद्याओं की उपासना मंत्र जप, तांत्रिक यज्ञ तथा गूढ़ साधना के माध्यम से करते हैं, जिसका आरम्भ माँ काली से होकर क्रमशः माँ कमलात्मिका तक पहुँचता है।

किन्तु गुप्त शक्तिपीठ आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिनों — जैसे चैत्र नवरात्रि के काल — में प्रकट होता है, जिससे साधक किसी महाविद्या से उनके ध्यान-श्लोक के माध्यम से प्रत्यक्ष सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं, बिना उनके लोक के उद्घाटन की प्रतीक्षा किए।

माँ तारा का आवाहन इतना सरल पूर्व में कभी नहीं रहा। आप इसका पूर्णतः सदुपयोग करें — यही मंगलकामना।

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सन्दर्भ :

drikpanchang.com

en.wikipedia.org