‘तंत्र साधना’ ऐप तथा तांत्रिक उपासना के नवोदय की गौरवमय प्रस्तुति
इस लेख में आप पढ़ेंगे :
पूर्वकाल में तंत्र को किस प्रकार देखा जाता था
'तंत्र साधना' ऐप का शुभारम्भ
प्रथम वर्ष कैसा रहा
तंत्र और इस ऐप की वर्तमान स्थिति
‘तंत्र साधना’ ऐप का सम्पूर्ण लाभ उठाएँ
'वैदिक साधना' ऐप के शुभारम्भ के लगभग ३ वर्षों के पश्चात् ओम स्वामी की वैदिक साधना फाउंडेशन ने 'तंत्र साधना' ऐप का शुभारम्भ किया। एक पूर्णतः निःशुल्क तथा विज्ञापन-रहित ऐप के रूप में यह सत्यनिष्ठ साधकों को दिव्याचार — दिव्य आचरण के पथ — के माध्यम से दशमहाविद्याओं की आन्तरिक रूप से जागृति करने की अनुमति देती है।
माँ काली से आरम्भ होकर माँ कमलात्मिका तक साधक प्रत्येक महाविद्या की जागृति अभिषिक्त, संरक्षित तथा जागृत मंत्रों एवं गूढ़ साधनाओं के माध्यम से करते हैं।
३ अप्रैल २०२५ को अनावृत हुई 'तंत्र साधना' ऐप तंत्र के पथ को देखने की दृष्टि को परिवर्तित कर गई।
पूर्वकाल में तंत्र को किस प्रकार देखा जाता था
आध्यात्मिकता की एक शाखा के रूप में तंत्र १५२६ ईस्वी से पूर्व सर्वाधिक निष्कलुष था — जिसके पश्चात् भारत में मुग़ल साम्राज्य का उदय आरम्भ हुआ। भारत में लगभग १७५० से १९४७ के मध्य विशेषतः ब्रिटिश शासन ने तंत्र की धारणा पर गहरा प्रभाव डाला, यहाँ तक कि भारत के स्वदेशी हिन्दुओं के बीच भी इसे देखने की दृष्टि परिवर्तित हो गई।
स्वतंत्र भारत में तंत्र की धारणा
ब्रिटिश शासन के काल में हिन्दुओं ने अपने ही धर्म के उन पक्षों को निरोधित करना आरम्भ कर दिया जिन्हें ब्रिटिश - जो प्रमुखतः ईसाई थे — अत्यधिक पाश्चात्य दृष्टि से आदिम अथवा धर्मविरुद्ध मानते थे। सनातन धर्म के कुछ पक्ष — जैसे मूर्ति-पूजा, विस्तृत अनुष्ठान तथा आन्तरिक रूपान्तरण की साधना के रूप में योग को देखने की परम्परा को हतोत्साहित किया गया, जबकि शुद्ध भक्ति, सामाजिक सेवा तथा अद्वैत या ‘नान-ड्युऐलिटी’ जैसे दर्शन के चिन्तन को अधिक उच्च स्थान प्राप्त हुआ।
चेतना को उत्कर्ष की ओर ले जाने के लिए निर्मित तांत्रिक अनुष्ठान धीरे-धीरे काला जादू समझे जाने लगे। लोगों ने सम्पूर्ण तंत्र को केवल अभिचार क्रियाओं या हानिकारक प्रभाव के षट्कर्मों — मारण, मोहन, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और वशीकरण — के साथ ही समीकृत करना आरम्भ कर दिया। तंत्र को एक ऐसे निषिद्ध पथ के रूप में देखा जाने लगा, जिसका अनुसरण वे लोग करते हैं जो भूत-प्रेत आदि से सम्बन्ध रखते हैं। सत्यनिष्ठ आध्यात्मिक साधकों को समाज द्वारा अधिक सामाजिक रूप से स्वीकृत पथों — जैसे भक्तिमार्गीय वैष्णव परम्परा तथा वेदान्तीय संन्यास — का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया गया।
पाश्चात्य जगत में तंत्र की धारणा
ब्रिटिश शासन के काल में, वे जिज्ञासु पाश्चात्य शोधकर्ता जो अपने धार्मिक मतों में अत्यधिक कठोर नहीं थे, भारत में तांत्रिक ग्रन्थों और परम्पराओं का अन्वेषण करने लगे। कुछ सत्यनिष्ठ आध्यात्मिक साधकों — जैसे सर जान वूड्रोफ़ — ने तंत्र के वास्तविक उपदेशों के संरक्षण, रहस्य-निवारण तथा प्रसार में अमूल्य योगदान दिया। किन्तु अधिकांश रुचि रखने वाले विदेशी लोग तंत्र के गूढ़ काम-सम्बन्धी पक्षों के प्रति अधिक आकर्षित थे।
उनका उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति नहीं, अपितु जीवन के सुखों — विशेषतः काम के सुख — की वृद्धि करना था। तंत्र के विषय में जो आंशिक ज्ञान उन्होंने प्राप्त किया और पाश्चात्य जगत में प्रसारित किया, उसके कारण वहाँ तंत्र को केवल इसी रूप में देखा जाने लगा : इन्द्रिय सुखों — विशेषतः काम-सुख — को बढ़ाने का एक आधिभौतिक साधन, जो तंत्र का वास्तविक उद्देश्य कभी भी नहीं था। अंततः उन्होंने तंत्र को पाश्चात्य ‘ओकल्टीज़्म’ में तथाकथित ‘सेक्स मैजिक’ के साथ वर्गीकृत कर दिया।
तंत्र पर आनलाइन कंटेंट का हालिया विस्तार
पिछले १० वर्षों में भारत के समस्त भागों में इंटरनेट सुलभ तथा वहनीय हो गया है। इससे आध्यात्मिकता के कम परिचित पक्षों पर आनलाइन कंटेंट में स्वाभाविक वृद्धि हुई, जिनमें तंत्र भी सम्मिलित है। यूट्यूब पोडकास्ट, इंस्टाग्राम रील्स, रेडिट फ़ोरम्स, तथा व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समुदायों के माध्यम से इसकी पहुँच अब पहले से कहीं अधिक विस्तृत हो चुकी है।
किन्तु अनेक स्रोत अभी भी तंत्र को वास्तविक जीवन की अलौकिक अथवा भूत-प्रेतों वाली 'हारर' कथाओं से सम्बद्ध विषय के रूप में मिथ्या रूप से प्रस्तुत करते हैं। तथापि कुछ ऐसे भी स्रोत हैं जो प्रमाणिक शास्त्रों और परम्पराओं के आधार पर तंत्र के वास्तविक उद्देश्य और उसकी गहनता को प्रस्तुत करते हैं।
इससे सत्यनिष्ठ तथा उदार-चित्त आध्यात्मिक साधकों — जैसे ध्यान, योग, आत्म-अन्वेषण या भक्ति-प्रधान उपासना करने वालों — को तंत्र का अन्वेषण करने की प्रेरणा प्राप्त हुई है — अपने दुःखों का शीघ्र तथा अधिक प्रभावी अतिक्रमण करने के साधन के रूप में।
'तंत्र साधना' ऐप का शुभारम्भ
२०२० के पश्चात् तंत्र के विषय पर आनलाइन कंटेंट में हुई वृद्धि — विशेषतः दशमहाविद्याओं (१० ज्ञानस्वरूपा देवियाँ) के रूप में जगन्माता की तांत्रिक उपासना — ने 'तंत्र साधना' जैसी ऐप के लिए एक आदर्श वातावरण निर्मित किया, जिससे तंत्र के अभिलाषी तथा साधनारत साधकों, दोनों को लाभ प्राप्त हो सके।
इसके अतिरिक्त ओम स्वामी द्वारा १ मार्च २०२२ को प्रारम्भ की गई 'वैदिक साधना' ऐप देवताओं की 'व्हर्चुअली असिस्टेड' मानस पूजा की आधारशिला पूर्व में ही स्थापित कर चुकी थी, जिसे तंत्र में दिव्याचार कहा जाता है — दक्षिणाचार, वामाचार तथा कौलाचार जैसे अधिक प्रचलित तांत्रिक मार्गों का एक आन्तरिक विकल्प।
ओम स्वामी तथा वैदिक साधना फाउंडेशन के विषय में
ओम स्वामी एक आधुनिक संन्यासी, सर्वाधिक विक्रयित ग्रन्थों के लेखक तथा पूर्व तकनीकी उद्यमी हैं, जो प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान को व्यावहारिक जीवन-मार्गदर्शन के साथ समन्वित करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने आस्ट्रेलिया में एक सफल कार्पोरेट जीवन के पश्चात् संसार का परित्याग किया और अपने समय के तंत्र के महान आचार्य दिवंगत नागा बाबा से श्रीविद्या आदि साधनाओं में दीक्षा प्राप्त की।
ओम स्वामी ने हिमालय में दीर्घ काल तक गहन ध्यान और साधना में समय व्यतीत किया, जिसके समय उन्होंने आत्म-साक्षात्कार की गूढ़ अवस्थाओं का अनुभव किया, जिनमें जगन्माता एवं भगवान विष्णु का प्रत्यक्ष दर्शन भी सम्मिलित है।

अपने आध्यात्मिक पथ की यात्रा के समय स्वामीजी ने वेदों और तंत्रों के प्रत्येक मूलभूत शास्त्र का अध्ययन तथा सिद्धि प्राप्त की है। वे १७ सर्वाधिक विक्रयित ग्रन्थों के लेखक हैं, जिनमें इफ़ ट्रुथ बी टोल्ड (उनका आत्मवृत्त), द एंशिएंट सायंस आफ़ मंत्रज़, द हिडन पावर आफ़ गायत्री मंत्र, कुण्डलिनी : ऐन अनटोल्ड स्टोरी, द लेजेंड आफ़ द गाडेस, तथा थर्टीन मंथ्स इन द हिमालयाज़ सम्मिलित हैं।
उनके उपदेश वेद, उपनिषद् तथा तंत्रशास्त्र जैसे पारम्परिक स्रोतों से उद्भूत हैं, किन्तु आधुनिक साधकों के लिए उन्हें एक सुव्यवस्थित, निर्देशात्मक स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।
हिमालय में अपने दीर्घकालीन एकान्तवास के समय उन्होंने उन्नत तांत्रिक साधनाएँ सम्पन्न कीं, जिनमें श्रीविद्या साधना तथा दशमहाविद्याओं को समर्पित साधनाएँ सम्मिलित हैं, जिन्हें उन्होंने दिव्याचार (मानस पूजा) के पथ का अनुसरण करते हुए सम्पन्न किया। अपने गैर-लाभकारी संगठन वैदिक साधना फ़ॉउंडेशन के माध्यम से उन्होंने सत्यनिष्ठ आधुनिक साधक के लिए इन्हीं दशमहाविद्या साधनाओं को प्रस्तुत किया है, जिसके लिए एक समर्पित ऐप — 'तंत्र साधना' ऐप — का निर्माण किया गया है।
‘तंत्र साधना’ ऐप की संकल्पना और उद्देश्य
'तंत्र साधना' ऐप का प्रमुख उद्देश्य दशमहाविद्याओं की प्रमाणिक तांत्रिक साधना को विश्वभर के सत्यनिष्ठ आध्यात्मिक साधकों के लिए सुलभ बनाना है, चाहे उन्हें किसी योग्य व्यक्तिगत गुरु से तंत्र की दीक्षा प्राप्त हुई हो या नहीं।
इसकी पवित्रता को बनाए रखने हेतु यह ऐप निःशुल्क तथा विज्ञापन-रहित है। साधक प्रत्येक अनुष्ठान के बाद अपनी इच्छा के अनुसार दक्षिणा अर्पित कर सकते हैं, किन्तु यह पूर्णतः वैकल्पिक है।
'तंत्र साधना' को १००% सुरक्षित बनाने के लिए सभी अनुष्ठान पूर्णतः मार्गदर्शित हैं, जिससे किसी भी प्रकार की त्रुटि की सम्भावना नहीं रहती। विविध तांत्रिक ग्रन्थों से ग्रहण किए गए प्रत्येक अनुष्ठान और मंत्र की प्रतिष्ठा तथा जागृति स्वामीजी द्वारा स्वयं की गई है।
थ्री-डी नैविगेशन के माध्यम से साधक किसी महाविद्या के लोक में पूर्णतः अवगाहित हो सकते हैं, उनके धाम में कार्यों और अनुष्ठानों को संचरण करते हुए पूर्ण करते हुए।
ऐप की यात्रा प्रथम महाविद्या माँ काली से आरम्भ होती है, जिसके पश्चात् क्रमशः अन्य महाविद्याओं के लोक और अनुष्ठानों का उद्घाटन एवं पूर्णता होती है, और अंततः माँ कमलात्मिका की साधना पर यह यात्रा सम्पन्न होती है।
अतः जब तक कोई साधक अंतिम साधना को पूर्ण करता है, तब तक वह अपने जीवन में दशमहाविद्याओं में से प्रत्येक की उपस्थिति, मार्गदर्शन एवं कृपा की अपरिवर्तनीय रूप से जागृति कर चुका होता है।
३ अप्रैल २०२५ को ऐप का शुभारम्भ
'तंत्र साधना' ऐप ३ अप्रैल २०२५ को 'गूगल प्ले' और 'ऐप स्टोर' पर डाउनलोड़ हेतु उपलब्ध कराई गई। उपयोगकर्ताओं ने तत्काल ही माँ काली के तांत्रिक मंत्र जप और यज्ञ का आरम्भ किया, तथा उनकी शक्तिशाली शव साधना की ओर अग्रसर होने लगे।
इस ऐप की प्रस्तुति स्वामीजी द्वारा की गई, जिन्होंने एक घण्टे से अधिक समय तक तंत्र, दिव्याचार के पथ, तथा इस विषय पर विस्तार से चर्चा की कि उन्होंने दशमहाविद्याओं के अनुष्ठानों को एक डिजिटल माध्यम के द्वारा प्रकट करने का निर्णय क्यों लिया।
अंततः, माध्यम कोई भी हो, जब साधक इन अनुष्ठानों को संपन्न करते हैं, तब उनकी चेतना में होने वाला रूपान्तरण निःसंदेह वास्तविक होता है।
प्रथम वर्ष कैसा रहा
'एंड्राइड' तथा 'आई ओ इस' के लिए ऐप के शुभारम्भ के लगभग एक माह के बाद 'तंत्र साधना' ऐप की टीम को उपयोगकर्ताओं से ऐसे अनुभवों के प्रतिवेदन प्राप्त होने लगे जिनमें उनके जीवन में स्पष्ट परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे — विशेषतः माँ काली की २१-दिवसीय शव साधना की पूर्णता के समीप। समय के साथ यह और अधिक स्पष्ट होता गया कि दिव्याचार के पथ द्वारा की गई तांत्रिक महाविद्या साधना शुद्ध एवं प्रभावकारी परिणाम प्रदान करती है।
विशेष उपासना-कालों में, नवरात्रि, महाविद्या जयंती, अमावस्या तथा पूर्णिमा जैसे प्रबल आध्यात्मिक अवसरों पर, ऐप के महाविद्या लोक में एक गुप्त शक्तिपीठ प्रकट होता था। सभी उपयोगकर्ता उस शक्तिपीठ में प्रवेश करके उस दिन की महाविद्या के ध्यान श्लोक का जप कर सकते थे, चाहे उन्होंने ऐप में उस महाविद्या के लोक को अनावृत किया हो या नहीं। यह परंपरा अभी भी जारी है।
'तंत्र साधना' ऐप इस प्रकार निर्मित है कि यह स्वयंपूर्ण है — उपयोगकर्ता केवल मंत्र, यज्ञ और साधनाएँ ही अनावृत नहीं करते, अपितु अपनी साधना-यात्रा के दौरान पत्रावलियों के माध्यम से महाविद्याओं से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण शास्त्रीय ज्ञान का भी अनावरण करते हैं।
तथापि उपयोगकर्ताओं की आध्यात्मिक यात्रा को अधिक समृद्ध बनाने हेतु हमारी टीम यूट्यूब चैनलों, इंस्टाग्राम पृष्ठों, ब्लाग लेखों तथा व्हाट्सऐप समूहों जैसे मंचों पर अतिरिक्त जानकारी भी साझा करती है।
तंत्र के विषय में जन-ज्ञान का विस्तार
तंत्र के प्रत्येक आध्यात्मिक साधक के पास इस परम्परा में उपलब्ध असंख्य शास्त्रों का अध्ययन करने हेतु समय, शक्ति और सामर्थ्य नहीं होता। अतः हमारे तांत्रिक विद्वानों द्वारा उपयोगी और प्रासंगिक ज्ञान का चयन करके उसे इस प्रकार प्रस्तुत किया गया, जिससे ऐप उपयोगकर्ता की साधना-यात्रा अधिक समृद्ध हो सके।
हमारे विषय-विशेषज्ञ तथा वरिष्ठ साधक यूट्यूब पर लाइव वर्कशाप्स भी आयोजित करते हैं, जिनका उद्देश्य ऐप के उपयोगकर्ताओं को विशेष अनुष्ठानों हेतु तैयार करना होता है, जैसे नवरात्रि जैसी महत्त्वपूर्ण तिथियों पर ऐप के महाविद्या लोक में प्रकट होने वाले गुप्त शक्तिपीठ में ध्यान श्लोकों का जप।
वे यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि आध्यात्मिक साधकों को तंत्र के विषय में उचित और शुद्ध दृष्टि प्राप्त हो, जिससे वे स्वयं यह निर्णय कर सकें कि यह वह पथ है जिसे वे अन्वेषित करना चाहते हैं या नहीं।
प्रचलित भ्रांतियों का निराकरण
ऐप द्वारा निराकृत की जाने वाली कुछ सामान्य भ्रांतियाँ निम्नलिखित हैं —
तंत्र काम-सुख की वृद्धि के लिए है
तंत्र अन्य व्यक्तियों को प्रभावित करने हेतु काले जादू का एक रूप है
तंत्र इच्छा-पूर्ति और मोक्ष-प्राप्ति का एक त्वरित मार्ग है
तंत्र गृहस्थों और नवारम्भकर्ताओं के लिए जोखिमपूर्ण है
तंत्र केवल सिद्धियों (अलौकिक शक्तियों) की प्राप्ति के लिए है
तंत्र अपने शुद्धतम स्वरूप में सामाजिक संस्कारों और सीमित मान्यताओं से ऊपर उठकर अपने भीतर स्थित दिव्यता की जागृति करने का पथ है।
तंत्र के भयों का निरसन
भ्रांतियों पर आधारित भय तंत्र साधना का आरम्भ करने वाले या साधना कर रहे साधकों की यात्रा में सबसे बड़ा अवरोध सिद्ध होते हैं। अतः उनका निराकरण अत्यन्त आवश्यक है, जिससे ऐप के उपयोगकर्ता अपने अनुष्ठानों को पूर्ण समर्पण के साथ, मन को प्रक्रियाओं में पूर्णतः निमग्न रखते हुए सम्पन्न कर सकें।
कुछ सामान्य, अविवेकपूर्ण तथा निराधार भय, जो साधकों को तंत्र साधना आरम्भ करने से रोकते हैं, निम्नलिखित हैं :
यह भय कि त्रुटि होने पर माँ काली जैसी उग्र महाविद्याएँ उन्हें दण्डित या विनष्ट करेंगी
यह भय कि साधना उन्हें संन्यासी बना देगी और परिवार तथा मित्रों से उनका सम्बन्ध तोड़ देगी
यह भय कि तंत्र साधना के कारण उन्हें अलौकिक अनुभव होने लगेंगे या वे किसी भयावह सूक्ष्म जीव के सम्पर्क में आ जाएँगे
यह भय कि उनकी कुण्डलिनी शक्ति समयपूर्व जागृत होकर उनके जीवन को विचलित कर देगी
यह भय कि तांत्रिक आध्यात्मिक साधना के कारण वे धन, भौतिक संपत्ति और व्यवसायिक अवसरों से वंचित हो जाएँगे
किन्तु यह सत्य से अत्यन्त दूर है। एक सत्यनिष्ठ साधक जो तंत्र साधना के पथ पर एक मार्गदर्शित और सुव्यवस्थित विधि से अग्रसर होता है - जैसे कि यह ऐप प्रदान करती है - वह केवल अपने आन्तरिक जगत में रूपान्तरण का अनुभव करता है, जहाँ बाधाएँ स्वाभाविक रूप से शिक्षाओं में परिवर्तित हो जाती हैं, और प्रत्येक श्वास में ईश्वर का स्मरण प्रकट होने लगता है।
सत्यनिष्ठ साधकों के लिए सुलभता का विस्तार
'तंत्र साधना टीम' यह सुनिश्चित करती है कि साधकों को आने वाली किसी भी समस्या का समाधान ईमेल तथा सोशल मीडिआ पर टिप्पणियों और प्रत्यक्ष संदेशों के माध्यम से किया जाए। ऐप के उपयोगकर्ताओं को आभासी थ्री-डी लोकों में सहजता से संचरण करने में सहायता देने हेतु विशेष वीडियो निर्देश भी प्रकाशित किए जाते हैं।

तंत्र और इस ऐप की वर्तमान स्थिति
तंत्र के प्रति लोगों की बढ़ती जिज्ञासा तथा तंत्र पर सत्यनिष्ठ आनलाइन कंटेंट में वृद्धि, और साथ ही 'तंत्र साधना' ऐप एवं वैदिक साधना फ़ाउंडेशन के अन्य प्रयासों को प्राप्त प्रतिक्रियाओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि केवल तंत्र ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण सनातन धर्म एक नव-जागरण के प्रारम्भिक चरण में स्थित है।
यहाँ 'तंत्र साधना' ऐप के प्रकाशन के एक वर्ष पश्चात् के कुछ आँकड़े प्रस्तुत हैं :
यह ऐप उन सभी आध्यात्मिक साधकों के लिए निर्मित है जो दिव्याचार के माध्यम से दशमहाविद्याओं की उपासना करना चाहते हैं। किन्तु यह विशेष रूप से उनके लिए अत्यन्त सहायक सिद्ध हुई है, जिन्हें सक्रिय रूप से प्रयास करने पर भी किसी योग्य व्यक्तिगत गुरु से तांत्रिक उपासना की दीक्षा प्राप्त नहीं हो सकी है।
अब यह ऐप एक व्हर्चुअल मार्गदर्शक और गुरु के रूप में स्थापित हो चुकी है।
‘तंत्र साधना’ ऐप का सम्पूर्ण लाभ उठाएँ
'तंत्र साधना' ऐप के अस्तित्व के लिए इससे अधिक उपयुक्त समय संभव नहीं था, क्योंकि :
स्मार्टफ़ोन तथा फ़ाइव जी इंटरनेट अब विश्वभर में सुलभ हो चुके हैं
आधुनिक जीवन की मानसिक अशान्ति ने आध्यात्मिक साधनाओं को अत्यावश्यक बना दिया है
दीक्षा को मूल्य के बदले प्रदान न करने वाले योग्य गुरु अब अत्यन्त दुर्लभ हो गए हैं
तंत्र के लिए आवश्यक कुछ भौतिक सामग्री अब प्राप्त करना कठिन हो गया है
तंत्र के प्रति हालिया जिज्ञासा नवारम्भकर्ताओं को असुरक्षित साधनाओं की ओर भी ले जा सकती है
ओम स्वामी कहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे साधना के द्वारा प्राप्त न किया जा सके। यदि आप अपने ४ पुरुषार्थों — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — को तंत्र तथा महाविद्या उपासना के पथ के माध्यम से सिद्ध करना चाहते हैं, तो 'तंत्र साधना' ऐप ही उपयुक्त साधन है।
केवल ४२३ दिनों में आप दशमहाविद्याओं को जागृत कर सकते हैं और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को सदा के लिए रूपान्तरित कर सकते हैं।
किसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं? आपका भावी स्वरूप आज आरम्भ करने के लिए आपको आभार व्यक्त करेगा। :)
जय माँ! 🙏
सन्दर्भ :
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