इस लेख में आप पढ़ेंगे :
- वर्ष की ४ मुख्य नवरात्रियाँ
- माघ गुप्त नवरात्रि
- २०२६ की तिथियाँ एवं समय
- विधि-विधान एवं प्रथाएँ
- 'तंत्र साधना' ऐप में गुप्त शक्तिपीठ
‘नवरात्रि’ शब्द ‘नव’ एवं ‘रात्रि’ से व्युत्पन्न है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह उत्सव ९ रात्रियों तक चलता है, जिनके समय जगन्माता तथा दिव्य स्त्री-तत्त्व की महिमा का उत्सव मनाया जाता है।
सामान्यतः इस कालखंड में जिन देवियों की उपासना की जाती है, उनमें महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली की संयुक्त शक्तियों से युक्त त्रिगुणात्मक स्वरूप में माँ दुर्गा, तथा माँ दुर्गा के ९ स्वरूप — नवदुर्गाएँ — सम्मिलित हैं।
इसी काल में तंत्र के साधक आदिशक्ति के तांत्रिक स्वरूपों, अर्थात् दशमहाविद्याओं (१० महान विद्या-देवियों) की उपासना भी करते हैं।
वर्ष की ४ मुख्य नवरात्रियाँ
प्राचीन पौराणिक, आगमिक और तांत्रिक ग्रंथ हिंदू पंचांग वर्ष में होने वाली ४ नवरात्रियों पर विशेष बल देते हैं, जो ऋतु परिवर्तन और चंद्र ऊर्जाओं के संक्रांत बिंदुओं के साथ समन्वित होती हैं।
नवरात्रि का आयोजन मासिक रूप में भी होता है, जिसे मासिक नवरात्रि कहा जाता है, जो शुक्ल प्रतिपदा से शुक्ल नवमी तक रहती है।
मुख्य ४ नवरात्रियाँ इस प्रकार हैं :
१) माघ नवरात्रि — माघ मास में (जनवरी/फ़रवरी)
२) चैत्र नवरात्रि — चैत्र मास में (मार्च/अप्रैल)
३) आषाढ़ नवरात्रि — आषाढ़ मास में (जून/जुलाई)
४) शारद नवरात्रि — आश्विन मास में (सितंबर/अक्टूबर)
हिंदू पंचांग में नए संवत् के आरंभ के रूप में मनाई जाने वाली मूल नवरात्रि चैत्र नवरात्रि थी।
शारद नवरात्रि उस काल से संबद्ध है जब भगवान् राम ने रावण से युद्ध पर प्रस्थान से पूर्व जगन्माता की उपासना की थी। इसी कारण इसे महानवरात्रि कहा जाता है। यह सभी नवरात्रियों में सर्वाधिक प्रचलित है — भारत भर में संगीत, नृत्य तथा उत्सवों के साथ भव्य रूप से मनाई जाने वाली नवरात्रि।
इसके विपरीत, माघ नवरात्रि और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रियाँ कहा जाता है। इनमें सार्वजनिक उत्सवों और सामाजिक आयोजनों के स्थान पर गहन तांत्रिक, शाक्त और साधना-आधारित अभ्यास किया जाता है, जिसका उद्देश्य द्रुत आध्यात्मिक उत्कर्ष होता है।
इसका कारण है…
माघ गुप्त नवरात्रि
तांत्रिक ग्रंथ समय को प्रवृत्ति (बाह्य गमन) और निवृत्ति (अंतर्मुखी प्रत्याहार) में वर्गीकृत करते हैं। माघ मास सौर चक्र की सर्वाधिक गहन निवृत्ति-अवस्था का सूचक है।
इस काल में सूर्य का उत्तरायण गमन आरंभ तो हो जाता है, किंतु जीवन-शक्ति का बाह्य प्रवाह अभी उदित नहीं होता। प्राण अंतर्मुखी हो जाता है।
इन्द्रियाँ स्वाभाविक रूप से शांत रहती हैं, लौकिक संलग्नता न्यून होती है, और शरीर शक्ति का संरक्षण करता है। शीत ऋतु में प्रकृति भी मंद हो जाती है — वनस्पतियाँ सुप्तावस्था में चली जाती हैं।
इस समय मन सहज ही अंतर्मुखी हो जाता है, जिससे यह काल बाह्य सामाजिक उत्सवों के स्थान पर मौन और एकांत में शक्ति-आवाहन हेतु एक पवित्र अवसर बन जाता है।
निवृत्ति काल में, जब साधक भीतर की ओर उन्मुख होता है, तब महाविद्याएँ अधिक सहजता से स्वयं को प्रकट करती हैं। यही महाविद्या साधना का मूल उपदेश है, जो साधक को बाह्य कर्मों से उठाकर सार्वभौम चेतना के आंतरिक बोध की ओर ले जाता है।
तंत्र का एक मौलिक सिद्धांत कहता है —
यदा बाह्य-शक्तिः संकुच्यते, तदा गुह्याः शक्तयः प्रकाशन्ते।
जब बाह्य ऊर्जा संकुचित होती है, तब गुह्य शक्तियाँ स्वयं को प्रकट करती हैं।
इसी काल में की जाने वाली महाविद्या साधना का आरंभ प्रायः मौनी/माघ अमावस्या, अर्थात् घोर अंधकार की अमावस्या-रात्रि में माँ काली के आवाहन से क��या जाता है।
२०२६ की तिथियाँ एवं समय
माघ गुप्त नवरात्रि (२०२६) अवधि : १९ जनवरी २०२६ से २७ जनवरी २०२६
घटस्थापना मुहूर्त — प्रातः ०७:१४ बजे से १०:४६ बजे तक
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त — अपराह्न १२:११ बजे से १२:५३ बजे तक
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि में स्थित है।
प्रतिपदा तिथि आरंभ — १८ जनवरी २०२६ को प्रातः ०१:२१ बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त — १९ जनवरी २०२६ को प्रातः ०२:१४ बजे
विधि-विधान एवं प्रथाएँ
चूँकि गुप्त नवरात्रियाँ अधिकतर तंत्र- और साधना-प्रधान होती हैं, इसलिए इस काल में किए जाने वाले अनुष्ठान और अभ्यास सामान्यतः उस दिन की संबंधित महाव��द्या के अनुरूप होते हैं। इसका कारण यह है कि शाक्त परंपरा में दशमहाविद्याएँ तंत्र साधना का मूल आधार मानी जाती हैं।
स्रोत : omswami.org
संकल्प ग्रहण करने के पश्चात् किए जाने वाले अनुष्ठान और अभ्यासों में सम्मिलित हैं :
- मंत्रों का जप
- श्रीमद् देवी भागवत एवं ब्रह्माण्ड पुराण जैसे शास्त्रों तथा स्तोत्रों का पाठ
- यज्ञ, अर्थात् अग्नि में आहुति अर्पण
- देवी की मूर्तियों अथवा यंत्रों (पवित्र ज्यामितीय आकृतियों) की पूजा
- उपवास रखना तथा ब्रह्मचर्य का पालन जैसे नियमों का अनुशीलन
'तंत्र साधना' ऐप में गुप्त शक्तिपीठ
इस वर्ष अंतर्मुखी हों और 'तंत्र साधना' ऐप के माध्यम से शक्ति का आवाहन करें।
यह निःशुल्क ऐप माँ काली से लेकर माँ कमलात्मिका तक प्रत्येक महाविद्या के निर्देशित मंत्र जप, यज्ञ तथा गुह्य साधनाएँ प्रदान करती है।
ये सभी अनुष्ठान दिव्याचार के सिद्धांतों के अनुरूप हैं, जो तंत्र में दिव्य आचरण और मानसिक उपासना का सर्वोच्च पथ माना गया है।

इस ऐप में गुप्त नवरात्रि जैसे प्रत्येक प्रभावशाली आध्यात्मिक कालखंड में गुप्त शक्तिपीठ प्रकट होता है। यह प्रत्येक साधक के लिए माँ की प्रत्येक महाविद्या की उनके ध्यान श्लोक के माध्यम से उपासना करने का एक स्वर्णिम अवसर होता है।
ध्यान श्लोक संस्कृत के ध्यानात्मक पद्य होते हैं, जिनमें देवी/देवता के स्वरूप, गुण और लक्षणों का वर्णन किया जाता है। इनका उद्देश्य साधक के मन को देवी/देवता पर एकाग्र करना, भक्ति का संवर्धन करना, तथ�� उनकी ऊर्जा के साथ तादात्म्य स्थापित करके उनकी कृपा को प्राप्त करना होता है।
ये श्लोक साधक को उस दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार कराने में सहायता करते हैं, जैसा कि गहन ध्यानावस्था में देवी/देवता का दर्शन करने वाले ऋषियों द्वारा शास्त्रों में वर्णित किया गया है।
आप यह चयन कर सकते हैं कि किसी महाविद्या के ध्यान श्लोक का जप कितनी बार करना है, और फिर प्रातः १२ से अगले दिन प्रातः १२ बजे तक की २४ घंटों की अवधि के भीतर उसे इच्छानुसार कितनी भी बार दोहरा सकते हैं।
उनके पवित्र ना��� के कारण ध्यान श्ल��कों को मंत्रों के समकक्ष माना जाता है।
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं ध्यानेनैव हि सिद्ध्यति |
मंत्र और कर्मकांड के बिना भी केवल ध्यान के माध्यम से ही सिद्धि प्राप्त होती है।
— कुलार्णव तंत्र (अध्याय ९)
माघ गुप्त नवरात्रि २०२६ के लिए गुप्त शक्तिपीठ का प्राकट्य —
१८ जनवरी (सोमवार) को प्रातः १२:०० बजे, और समापन —
२७ जनवरी को प्रातः १२:०० बजे
इस शक्तिशाली कालखंड का सदुपयोग करें, प्रत्येक महाविद्या की विविध एवं प्रभावशाली ऊर्जाओं से जुड़ें, और अपने भीतर स्थित शक्ति को जागृत करें।
प्रारंभ : १७ जनवरी, सायं ७ बजे (भारतीय समय)।
अधिक जानकारी हेतु व्हाट्सऐप ग्रूप में सम्मिलित हों।
संदर्भ :


