महाशिवरात्रि २०२६ : उद्गम, महत्त्व, तिथियाँ और समय
इस लेख में आप पढ़ेंगे :
शास्त्रीय उद्गम
आध्यात्मिक महत्त्व
महाशिवरात्रि २०२६ हेतु तिथियाँ एवं समय
ओम स्वामी सहित महा रुद्र साधना
संस्कृत में ‘महा’ का अर्थ है महान, और ‘रात्रि’ का अर्थ है रात। अतः महाशिवरात्रि एक हिन्दू उत्सव है, जिसका अर्थ है भगवान शिव की महान रात्रि (शिव - रूपांतरणकारी संहार और आध्यात्मिक प्रबोधन के तपस्वी देवता)। महाशिवरात्रि उनकी उपासना करने का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कालखंड है तथा सामान्यतः योग और ध्यान जैसी आध्यात्मिक साधनाओं के लिए अत्यन्त प्रभावशाली अवधि है।

शास्त्रीय उद्गम
शिवपुराण, स्कन्दपुराण, लिंगपुराण तथा शैव आगम ये कुछ प्रमुख, प्रामाणिक हिन्दू ग्रन्थ हैं जो भगवान शिव, उनकी विविध कथाओं तथा उनकी उपासना अथवा साक्षात्कार की विधियों का वर्णन करते हैं। शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता महाशिवरात्रि उत्सव के प्रमुख शास्त्रीय उद्गमों में से एक है।
इसमें वर्णित है कि जब भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के मध्य यह विवाद हुआ कि कौन सर्वोच्च है, तब भगवान शिव ने उनके अहंकार की परीक्षा लेने हेतु अनन्त ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए - एक ऐसा दिव्य ऊर्ध्व प्रकाश-स्तम्भ जिसका आदि और अन्त नहीं था। भगवान विष्णु ने स्वीकार किया कि वे उसका आदि और अन्त नहीं खोज सके, जबकि भगवान ब्रह्मा ने असत्य कहा कि उन्होंने उसे खोज लिया। तब भगवान शिव ने अपने तृतीय नेत्र से कालभैरव को प्रकट किया, जिन्होंने ब्रह्मा के पंचम शिर का छेदन करके उन्हें यथार्थ का बोध कराया।
यहाँ भगवान ब्रह्मा अहंकार का प्रतीक हैं। भगवान शिव, उस अनन्त प्रकाश-स्तम्भ के रूप में, ब्रह्म नामक परम तत्त्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। उसका साक्षात्कार केवल अहंकार के नाश (शिरच्छेदन) के पश्चात् ही संभव है।
क्योंकि यह असीम प्रकाश-स्तम्भ हिन्दू मास माघ/फाल्गुन के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी की रात्रि में प्रकट हुआ था, अतः वह पवित्र रात्रि प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है।
आध्यात्मिक महत्त्व
शैव आगमों के अनुसार, चन्द्रमा मनस् का प्रतीक है। और कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (अमावस्या से पूर्व की चतुर्दशी तिथि) को वह लगभग अदृश्य हो जाता है। अतः मानसिक वृत्तियों का केवल सूक्ष्म अवशेष शेष रहता है।
यह अहंकार के विलयन तथा शुद्ध चैतन्य के अनुभव, अथवा चिन्तनशील मन के साक्षी-चेतना की स्थिरता में लय के लिए आदर्श काल है।
अतः प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि माना जाता है। उनमें से माघ/फाल्गुन की शिवरात्रि को शिवपुराण तथा लिंगपुराण जैसे ग्रन्थों द्वारा सर्वाधिक प्रभावशाली माना गया है, क्योंकि यह शिशिर ऋतु (संकोचन का काल) के अंत में तथा वसन्त ऋतु (विस्तार का काल) के उदय से पूर्व आती है।
यह वर्ष का वह ऋतु-परिवर्तन समय है जब स्थिरता अपनी पराकाष्ठा पर होती है, जिससे मन को स्थिर करने के लिए पूर्ण अनुकूल स्थितियाँ निर्मित होती हैं — चाहे आन्तरिक साधना द्वारा अथवा भगवान शिव की कृपा की प्राप्ति हेतु बाह्य उपासना द्वारा।
महाशिवरात्रि २०२६ हेतु तिथियाँ एवं समय
भारतीय मानक समय (आई एस टी) के अनुसार, महाशिवरात्रि २०२६ का तिथि-विवरण निम्नलिखित हैं :
तिथियाँ : १५ एवं १६ फरवरी २०२६ (रविवार एवं सोमवार)
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ : १५ फरवरी २०२६ (रविवार) सायं ०५:०४ बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त : १६ फरवरी २०२६ (सोमवार) सायं ०५:३४ बजे
निशीथ काल पूजा : १२:०९ रात्रि से ०१:०१ रात्रि (१५–१६ फरवरी)
शिवरात्रि पारण : प्रातः ०६:५९ से अपराह्न ०३:२४ (१६ फरवरी)
प्रथम प्रहर : सायं ०६:११ से ०९:२३ (१५ फरवरी)
द्वितीय प्रहर : ०९:२३ रात्रि से १२:३५ रात्रि (१५–१६ फरवरी)
तृतीय प्रहर : १२:३५ रात्रि से ०३:४७ प्रातः (१६ फरवरी)
चतुर्थ प्रहर : ०३:४७ प्रातः से ०६:५९ प्रातः (१६ फरवरी)
ओम स्वामी सहित महारुद्र साधना
कहा जाता है कि महाविद्या साधना भगवान भैरव के बिना अपूर्ण है। जहाँ देवी हैं, वहाँ भैरव भी हैं, जो साक्षी-चेतना के रूप में उन्हें समर्थित करते हैं।
'तंत्र साधना' ऐप में महाविद्या साधनाओं के समय उनका सूक्ष्म रूप से आवाहन किया जाता है। अब आपको उनके उग्र रुद्र तत्त्व का पूर्ण एकाग्रता से आवाहन करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त है।
लगभग एक वर्ष के उपरांत, वैदिक साधना फ़ाउंडेशन के संस्थापक तथा 'वैदिक साधना' और 'तंत्र साधना' ऐप्स के स्रष्टा ओम स्वामी हमारे साथ १५ फरवरी (महाशिवरात्रि) से २६ फरवरी तक १२-दिवसीय महारुद्र साधना सम्पन्न करने हेतु सम्मिलित होंगे।

विश्व के किसी भी स्थान से कोई भी साधक पूर्णतया निःशुल्क, केवल ‘वैदिक साधना’ ऐप के माध्यम से सहभागी हो सकता है, आरम्भ से अंत तक किसी भी भौतिक तैयारी की चिंता किये बिना, क्योंकि यह साधना पूर्णतः वर्चुअल है। दक्षिणा ऐच्छिक है, तथा उसकी राशि का निर्णय आप स्वयं कर सकते हैं।
इसका आरम्भ कैसे होगा
महाशिवरात्रि (१५ फरवरी) को सायं ६:०० बजे (भारतीय मानक समयानुसार), ओम स्वामी महाशिवरात्रि अभिषेक सम्पन्न करेंगे तथा रुद्र साधना मंत्र का उद्घाटन करेंगे, और साधना का लाइव औपचारिक आरम्भ करेंगे। साधक ऐप में साथ-साथ अभिषेक कर सकते हैं।
इसके पश्चात, प्रत्येक दिवस का आरम्भ प्रातः ५:१५ बजे (ब्रह्ममुहूर्त में) लाइव यज्ञ से होगा, जिसमें ओम स्वामी द्वारा क्रमबद्ध मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। साधना में प्रदत्त मंत्र का नित्य जप भी सम्मिलित होगा। प्रतिदिन का समय-निवेशन केवल १ घंटा है।
तांत्रिक शास्��्रों के अनुसार, भगवान शिव ने भैरव रूप में अपनी अर्धांगिनी माँ भैरवी — जो तंत्र साधना अनुप्रयोग में पूजित महाविद्याओं में से एक हैं — के साथ अनेक गहन संवादों में समस्त विद्यमान तांत्रिक ज्ञान का उद्घाटन किया। इस प्रभावशाली काल में उनकी उपस्थिति का आवाहन करना आपकी तांत्रिक महाविद्या साधनाओं को स्पष्ट रूप से उन्नत करने में समर्थ होगा।
तांत्रिक शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव ने भैरव रूप में अपनी अर्धांगिनी माँ भैरवी — 'तंत्र साधना' ऐप में पूजित महाविद्याओं में से एक — के साथ अनेक गहन संवादों में समस्त विद्यमान तांत्रिक ज्ञान को प्रत्यक्ष किया। अतः इस प्रभावशाली काल में उनकी उपस्थिति का आवाहन करना आपकी तांत्रिक महाविद्या साधनाओं को स्पष्ट रूप से उन्नत करेगा।

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